Bokaro: लोगो कि जान बचाने के लिए पिछले पांच दिनों से लगातार ट्रेनों द्वारा बोकारो से दूसरे राज्यों में ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। संकट के इस घड़ी में रेलवे कर्मचारियों जिस जज्बे के साथ अपना योगदान दे रहे है वह अतुल्य है। इस घड़ी में देश भक्ति के भावना के साथ बोकारो का हरेक रेल कर्मी ऑक्सीजन एक्सप्रेस को भेजने में लगा हुआ है।
बता दे की बोकारो में भी कोरोना के 2000 से अधिक एक्टिव केसेस है। यहां की स्तिथि भी बिगड़ी हुई है। ऑक्सीजन है, पर अस्पतालों में बेड नहीं है। पर अपनी जान की परवाह किये बगैर दिन-रात ट्रेनों को भेजने में लगे हुए रेल कर्मी न थक रहे है और न ही वायरस से डर रहे है। बल्कि निगाहे बिछा दूसरी ऑक्सीजन एक्सप्रेस आने का इंतेज़ार कर रहे है।
बोकारो के एक रेलवे अधिकारी (स्टेशन मैनेजर, ए के हालदार) ने ऑक्सीजन एक्सप्रेस के आने से लेकर जाने के पुरे दृश्य को अपने शब्दों कुछ इस तरह लिखा है:

वह एक अभूतपूर्व दृश्य था जब लखनऊ से ऑक्सीजन टैंकर से लदी एक ट्रेन बोकारो स्टील सिटी स्टेशन में प्रवेश की। तब सुबह के 7:25 बजे थे, तमाम अधिकारी एवं कर्मचारी गाड़ी के स्वागत के लिए खड़े थे। गाड़ी के प्रवेश करने के तुरंत बाद ही इतनी तीव्रता से काम शुरू हो गया जैसे कोई युद्ध चल रहा हो। 7 बचकर 35 मिनट में शंटिंग इंजिन राधा गांव के साइड में लगाकर, इस ट्रैन को डीजल शेड रवाना कर दिया गया। 10 मिनट की छोटी अंतराल में इतना बड़ा काम शायद ही पहले कभी हुआ होगा, पर हमने कर दिखाया। क्युकी हमे समय से जुड़े हरेक सांस की कीमत पता थी।
क्षेत्रीय रेल प्रबंधक प्रभात प्रसाद भी वही थे। साथ ही बोकारो की डी टीआई के के गोस्वामी एवं एस के तिवारी लोग भी पूरी तन्मयता के साथ लगे हुए थे। इन टैंकरों को डीजल शेड पहुंचाने के बाद इसे ट्रेन से उतारना और बीएसएल मे रिफिलिंग करने के लिए भेजना एक अभूतपूर्व कार्य था। जिसे पहले यहां किसी ने नहीं किया था। पर हम जानते थे की हमें ही करना था और बिना किसी चूक के करना था। यह पूरा दृश्य किसी मूवी से कम नहीं था। हरेक रेलकर्मी की सांस मानो उन मरीजों के सांस के साथ जुड़ गई थी, जिनकी साँसे ऑक्सीजन के आस में अटकी हुई थी।
कर्मचारियों द्वारा रिकॉर्ड टाइम में एक-एक टैंकर का नट बोल्ट ढीला कर ट्रेन से नीचे उतारा गया। बिना समय गवाए वह टैंकर बीएसएल प्लांट में ऑक्सीजन भरने के लिए गए। कुछ घंटो बाद जब वह तमाम टैंकर आये तो उन्हें फिर ट्रेन मे चढ़ाया गया और मजबूती से ट्रेन के साथ नट बोल्ट के माध्यम से बांधा गया। और गाड़ी को जल्द से जल्द रवाना किया गया। इंजन के ड्राइवर, गार्ड और अन्य कर्मचारी जो रुखा-सूखा मिला खाना खाये और निकल पढ़े।
ऑक्सीजन एक्सप्रेस को रिसीव करने से लेकर उसको भेजने तक कोई भी रेलवे कर्मचारी ड्यूटी से कही ज्यादा देश की सेवा कर रहा है। हम तैयार है गाड़ी आती रहेगी हम भेजते रहेंगे। पुरे भारत में कही भी ऑक्सीजन की कमी होने नहीं देंगे। यह हमारा कमिटमेंट है अपने आप से, अपने देश से।
ऑक्सीजन एक्सप्रेस से विभिन्न राज्यों में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति जारी है
ऑक्सीजन एक्सप्रेस से बीएसएल द्वारा लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति लगातार जारी है. विगत 23 अप्रैल से 27 अप्रैल तक कुल 6 रेक लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति बोकारो स्टील प्लांट से की जा चुकी है. इनमें से पाँच रेक में 15 टैंकर लखनऊ के लिए और एक रेक में 6 टैंकर भोपाल के लिए भेजी गई है. लखनऊ के लिए 5 टैंकर का एक और रेक 76 टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन लेकर 28 अप्रैल देर शाम रवाना हुआ जबकि देर रात तक एक और रेक लखनऊ से बोकारो पहुँचने की संभावना है. इस प्रकार बीएसएल द्वारा 28 अप्रैल तक कुल 332 मेट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन का डिस्पैच ऑक्सीजन एक्सप्रेस से की गई है.
ऑक्सीजन एक्सप्रेस से आपूर्ति के साथ-साथ विभिन्न राज्यों में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन का रोड डिस्पैच भी जारी है. 1 – 27 अप्रैल तक बोकारो स्टील प्लांट से झारखंड समेत उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल इत्यादि में 3000 मेट्रिक टन से अधिक लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन भेजी जा चुकी है.
