Bokaro : झारखंड विधानसभा बजट सत्र में सरकार द्वारा लाए गए बजट प्रस्ताव के चर्चा में भाग लेते हुए बोकारो विधायक सह विरोधी दल के मुख्य सचेतक बिरंची नारायण आज सदन में कुछ अलग ही अंदाज़ में नजर आये। विधायक ने सदन में जिस तरह राज्य की समस्याओं को सामने रख सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट पर कटाक्ष किया, उसकी सबने तारीफ की।
अपने 25 मिनट के सम्बोधन में विधायक कभी गंभीर हुए, तो कभी मजाकिया लहजे में बातों को रखा, तो कभी गाने का छंद सुनाकर सरकार के मंत्रियो की खिंचाई की, तो कभी चुनौती देकर मामले की गंभीरता पर सदन का ध्यान आकर्षित किया। कुल मिलाकर आज बोकारो विधायक फुल-फॉर्म में दिखे। राज्य के हर मुद्दों को छुआ और सरकार के हर विभाग की पोल-खोल डाली।

अपने इसी सम्बोधन में विधायक ने खासतौर पर बोकारो से जुड़ी दो बातों – मेडिकल कॉलेज और विस्थापन की समस्या- को मजबूती से न सिर्फ सदन में उठाया, बल्कि मुख्यमंत्री से सीधे-सीधे यह भी बोल दिया की बोकारो में उनका बचपन बीता है, उस अधिकार से इस मसले को गंभीरता से ले। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी नारायण की इन बातों को सुनकर मुस्कुराये।
बोकारो के मेडिकल कॉलेज की मांग करते हुए विधायक ने मुख्यमंत्री से किया आग्रह
हमारी रघुबर सरकार ने 5 मेडिकल कॉलेज में काम शुरू कराया था। उनमे 3 में पढ़ाई भी शुरू करवा दी थी। पर अध्यापको और प्रोफेसर के कमी के चलते MCI ने नामांकन में रोक लगा दी। कमिया चाहे जो भी हो, पर 3.25 करोड़ लोगो के स्वास्थ के विषय में पक्ष हो या विपक्ष दोनों को गंभीरता से सोचना चाहिए। मैं मुख्यमंत्रीजी से आग्रह करता हूँ, की वह बोकारो में SAIL-BSL द्वारा सेक्टर-12 के फोर लेन के बगल में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए आवंटित की गई 25 एकड़ जमीन पर गंभीरता से सोचे। वहां मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए कुछ करे। हम यह सोचना चाहिए, की राज्य के उन पिछड़े ज़िलों में अगर हम मेडिकल कॉलेज खोलते है, तो हमे प्रोफेसर मिलने में कठिनाई होगी। अगर हम मेडिकल कॉलेज उन ज़िलों में खोलेंगे जो थोड़े आगे बढ़े हुए है, तो हमे प्रोफेसर मिल सकते है। बाहर से प्रोफेसर सुविधाजनक तरीके से आ भी पाएंगे। मुख्यमत्रीं जी का बचपन भी बोकारो में बीता है, इस नाते मेरा उनपर एक अधिकार भी है, उसी नाते में उनसे यह आग्रह करते हूँ की वह इस बारे में कुछ सोचे, हमलोगो को उनसे बहुत उमीदे है।
विस्थापितों की समस्या पर दी चुनौती
विधायक सदन में विस्थापितों की समस्या को बताते हुए थोड़े संजीदा दिखे। उन्होंने सीधे-सीधे सरकार पर आरोप लगाया की वह विस्थापन आयोग की घोषणा कर भूल गए। उन्होंने कहा आज एक साल से ऊपर हो गया पर सरकार विस्थापन आयोग के स्थापना के बारे में कुछ भी नहीं किया। स्तिथि यह है की राज्य के सारे विस्थापित चाहे वह बोकारो इस्पात संयंत्र के हो या सीसीएल, बीसीसीएल या डैम के हो, सब सरकार पर टक-टकी लगाए बैठे है। सरकार को जल्द से जल्द विस्थापन आयोग का गठन करना चाहिए।
एक के बाद एक, विधायक, द्वारा जनहित से जुड़े मुद्दों, समस्याओ और बजट पर कटाक्ष करते देख सरकार पक्ष के विधायकों ने प्रतिक्रिया व्यक्त की और कई बार सदन में उठकर बीच में बोले भी। यहां तक की मुख्यमंत्री ने भी मुस्कुराते हुए कहा की माननिये बिरंचि नारायण जी आपने सवाल भी पूछा है और जवाब भी माँगा है। आपको जवाब मिलेगा। पर आपसे करबद्ध प्राथना है की जवाब सुनने के लिए आप सदन में जरुर मौजूद रहियेगा।
