Bokaro : कूल्हे और हाथ टूटने के असहनीय दर्द में जी रही एक 97 साल की बुजुर्ग महिला ने आज शुक्रवार को के.एम मेमोरियल हॉस्पिटल में न सिर्फ मुस्कुराया बल्कि उठकर बैठी और कुछ खाया भी। उम्र के इस पड़ाव में उक्त बुजुर्ग महिला को मानों फिर एक नई ज़िन्दगी मिल गयी हो।
10 दिन पहले दर्द में कहराती उक्त बुजुर्ग महिला के.एम मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंच, वहाँ के चेयरमैन डॉ विकास पांडेय को सिर्फ इतना कहा था की -“क्या बेटा, मेरा इलाज नहीं हो पायेगा”, जिसे उन्होंने दिल पर ले लिया। उन्होंने तुरंत अपने अस्पताल के हड्डी विभाग के हेड डॉ रणवीर सिंह से मंत्रणा की। जिस उम्र के मरीज का डॉक्टर्स ऑपरेशन करना अवॉयड करते है, डॉ विकास और ओर्थपेडीक डॉ रणबीर ने ऑपरेशन करने को चैलेंज के रूप में लिया और राजी हो गए।

उक्त बुजुर्ग महिला लक्ष्मी देवी चास की रहने वाली है। हड्डी टूटने से न वह ठीक से बैठ पा रही थी, न चल और न ही लेट पा रही थी। घर में फिसल कर गिर जाने से उनके कूल्हे और हाथ दोनों एक साथ फ्रैक्चर हो गए थे। पहले उनके घरवाले, दूसरे अस्पतालों में ले गए पर मरीज़ की 97 साल की उम्र को देखते हुए, लगभग सभी नें उनका इलाज करने से मना कर दिया। ऐसी स्तिथि में घरवाले निराशा के साथ के.एम मेमोरियल पहुंचे। घरवाले भी चिंतित थे उन्होंने भी डॉ विकास से इलाज करवाने के लिए अनुरोध किया।

डॉ विकास ने उन्हें हामी भर दी और मरीज डॉ रणबीर के यूनिट में भर्ती हो गई। एक तो अधिक उम्र और दूसरा उनका कार्डियक कंडीशन कमजोर होने के साथ-साथ शुगर होना, डॉ रणबीर को बार-बार सोचने पर मजबूर कर रहा था, की ऑपरेशन होगा कैसे? क्युकी हड्डी के सर्जरी के लिए उन्हें बेहोश करना जरुरी होता। फिर उन्होंने यह समस्या अपने डॉक्टर मित्र और अनेस्थेटिक्स डॉ अलोक झा के साथ-साथ डॉ विकास पांडेय को बताई। मरीज की स्तिथि जानकर, उन दोनों ने उनका मनोबल बढ़ाया।
फिर क्या था, डॉ रणवीर सिंह और उनकी टीम नें इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को किया। डॉ अलोक झा ने नवीनतम तकनीक का उपयोग करते हुए देवी को बिना बेहोश किये सिर्फ फ्रैक्चर वाले भाग को सुन्न किया, और डॉ रणबीर ने मात्र 30 मिनट में दोनों हाथ और कूल्हे को सफलतापूर्वक ऑपरेशन करते हुए जोड़ दिया। ऑपरेशन के बाद देवी को चेस्ट इन्फेक्शन भी हुआ था, पर आज शुक्रवार को वह ठीक हो गयी और ऑपरेशन के बाद पहली बार उठ कर बिस्तर पर बैठी।
डॉ रणबीर ने कहा “ऑपरेशन जटिल था, पर अगर नहीं करता तो कुछ दिनों में उनकी स्तिथि और ख़राब हो जाती। ऑपरेशन अच्छे से हो गया और वह अब ठीक है। जितनी दुआए उन्होंने मुझे दी है, वह मेरे लिए सबसे अनमोल है”। डॉ विकास पांडेय बताते है की हमारी अत्याधुनिक ट्रॉमा टीम निरंतर आधुनिक तकनीक से मरीजों को फायदा पहुंचा रही है, जिससे गम्भीर मरीजों को इलाज के लिए अब बड़े शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ रही.
