Bokaro: वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण से उबरे कुछ लोगों पर अब ब्लैक फंगस का भी हमला हो रहा है। बोकारो में पिछले एक हफ्ते में ब्लैक फंगस के तीन मामले आये है, जिसमे दो लोगो की मौत हो गई है। और एक को बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफेर किया गया है। वही शुक्रवार को बीजीएच में ब्लैक फंगस का एक संदिग्ध मरीज भी पाया गया है।
जिला स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को मधुमेह वाले कोविड मरीजों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश जारी किया है। कोविड मरीजों के इलाज में लगे बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) के प्रबंधन ने भी इसी तरह का दिशा-निर्देश अपने डॉक्टरों के टीम को दिया हैं। ज़िले के अन्य प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले आँखों के डॉक्टर भी सतर्क हो गए हैं।

सिविल सर्जन डॉ ए के पाठक ने कहा कि ज़िले में पिछले एक हफ्ते में ब्लैक फंगस के लक्षण वाले दो मरीज मिले हैं। “चंद्रपुरा निवासी एक 32 वर्षीय महिला में ब्लैक फंगस के लक्षण मिले है। जिसके तुरंत बाद उसे इलाज के लिए रिम्स, रांची रेफर कर दिया गया है। जबकि बेरमो निवासी एक बुजुर्ग आदमी में भी ब्लैक फंगस का लक्षण पाया गया था पर उसकी मृत्यु हो गई। उक्त दोनों मरीजों में कोरोना से स्वस्थ होने के बाद ब्लैक फंगस के लक्षण मिले थे। दोनों को मधुमेह था”।
डॉक्टर पाठक ने कहा, “हमने डॉक्टरों से कहा है कि वे अनियंत्रित मधुमेह, स्टेरॉयड के उपयोग के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली के कमजोर होने, लंबे समय तक आईसीयू / अस्पताल में रहने, अंग प्रत्यारोपण, कैंसर और वोरिकोनाज़ोल थेरेपी (उपचार के लिए प्रयुक्त गंभीर फंगल संक्रमण) के कोविड रोगियों पर नजर रखें”।
बीजीएच में भी ब्लैक फंगस ने दस्तक दे दी है। बीजीएच ज़िले का समर्पित कोविड अस्पताल हैं। जिसमें शनिवार को 230 कोविड रोगी इलाजरत हैं। बताया जा रहा है की छह दिन पूर्व एक 68 वर्षीय महिला की ब्लैक फंगस से मृत्यु बीजीएच में हो चुकीं है। महिला को मधुमेह था और वह कोविड से ठीक हो गई थी, लेकिन कुछ दिनों बाद वह फिर से भर्ती हुई। पर जब तक डॉक्टर इलाज शुरू कर पाते तब तक उसकी मृत्यु हो गई। वह पूर्व बीएसएल अधिकारी की पत्नी थी।
बीजीएच में फिर से ब्लाक्स फंगस का एक संदिग्ध मामला आया हुआ है। इस बार एक 72 वर्षीय पुरुष में लक्षण पाए गए हैं। उन्हें मधुमेह भी है। बीजीएच के एक डॉक्टर ने कहा कि उक्त मरीज का समुचित इलाज हो रहा है। बीजीएच प्रबंधन ने कोविड वार्ड में लगे डॉक्टरों को मधुमेह के कोविड रोगियों पर विशेष नजर रखने के लिए कहा है।
शहर के प्रमुख नेत्र रोग विशेषज्ञ, डॉ अंबरीश सोनी ने भी कहा कि एक सप्ताह पहले बेरमो के कथारा से ब्लैक फंगस के लक्षणों वाला एक रोगी इलाज के लिए उनके पास आया था। हालांकि इलाज शुरू होने से पहले उसकी मौत हो गई। वह बुजुर्ग और मधुमेह रोगी थे। कोविड के बाद उन्हें इस बीमारी का सामना करना पड़ा। “कोरोना के रोगी जिनको मधुमेह हैं, उन्हें अत्यधिक देखभाल करने की आवश्यकता है,” डॉ सोनी ने कहा।
सिविल सर्जन ने कहा कि वे स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। कोविड-19 से उबरने के बाद, लोगों को गहराई से निगरानी करनी चाहिए और किसी भी चेतावनी संकेत एवं लक्षण को याद रखना चाहिए, क्योंकि फंगल संक्रमण कोविड-19 से उबरने के कई हफ्तों या महीनों के बाद भी उभर सकता है। संक्रमण के खतरे से बचने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्टेरॉयड का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। बीमारी का जल्द पता लगने से फंगल संक्रमण के उपचार में आसानी हो सकती है।
सामान्य लक्षण क्या हैं?
हमारे माथे, नाक, गाल की हड्डियों के पीछे और आंखों एवं दांतों के बीच स्थित एयर पॉकेट में त्वचा के संक्रमण के रूप में म्यूकोर्मिकोसिस दिखने लगता है। यह फिर आंखों, फेफड़ों में फैल जाता है और मस्तिष्क तक भी फैल सकता है। इससे नाक पर कालापन या रंग मलिन पड़ना, धुंधली या दोहरी दृष्टि, सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई और खून की खांसी होती है।
आईसीएमआर ने सलाह दी है कि बंद नाक के सभी मामलों को बैक्टीरियल साइनसिसिस के मामलों के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, खासकर कोविड-19 रोगियों के उपचार के दौरान या बाद मेंबंद नाक के मामलों को लेकर ऐसा नहीं करना चाहिए। फंगल संक्रमण का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
