Bokaro: करीब तीन दर्ज़न बंद पड़े बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) के स्कूलो को खंडहर में तब्दील होता देख यहां के निवासी परेशान है। लोगो की भावना को समझते हुए, भाजपा के मुख्य सचेतक और विधायक बिरंची नारायण ने इन बंद पड़े स्कूलों को पुनः सुचारू ढंग से शुरू करवाने की मांग करते हुए विधानसभा में प्रश्न किया। उन्होंने सरकार के प्रभारी शिक्षा मंत्री मिथलेश कुमार ठाकुर से विधानसभा में इससे सम्बंधित सवाल भी पूछा।
विधायक ने सरकार से यह पूछा –
विधायक ने साफ़ शब्दों में राज्य सरकार को बताया की बोकारो स्टील सिटी में लगभग -4 दर्जन स्कूल संचालित होते थे, जिनके पास अपना विशाल भवन तथा काफी भू – खण्ड भी उपलब्ध है। उक्त -4 दर्जन विद्यालयों में से लगभग -3 दर्जन से भी अधिक विद्यालय अब बंद हो चुके हैं। इन बंद पड़े विद्यालयों के भवनों के उचित रख रखाव के अभाव में ये विद्यालय भवन खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं। इनमें लगे दरवाजे खिड़कियाँ एवं बिजली उपकरण, इत्यादि धीरे-धीरे चोरों द्वारा चोरी किए जा रहे हैं।

उन्होंने सरकार से यह पूछा की इन बंद पड़े विद्यालय भवनों में वर्तमान में आसामाजिक तत्वों को अड्डा बन गया है। विद्यार्थी हित में संचालित वर्णित उक्त विद्यालयों को पुनः सुचारू ढंग से शुरू करवाने अथवा उक्त खंडहर में तब्दील हो रहे विद्यालय भवनों एवं उनकी परिसंपत्तियों के रक्षार्य क्या सरकार आवश्यक कदम उठाने का विचार रखती है?
इस पर सरकार का जवाब –
विद्यालय बोकारो इस्पात संयंत्र के नियंत्रणाधीन है एवं उनके द्वारा ही विद्यालयों को संचालित किया जाता है। उप महाप्रबंधक, शिक्षा विभाग, बोकारो इरपात लिमिटेड नगर, प्रशासन भवन, सेक्टर -4 से प्रतिवेदन की मांग की गयी थी। सहायक प्रबंधक ( शिक्षा ) द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि संयंत्र में कर्मचारियों की संख्या में कर्मी तथा तदनुसार उसके आश्रितों के संख्या में भारी कमी के कारण विद्यालय की संख्या विलय कर कम की गई है। वर्तमान में 10 विद्यालय में शिक्षण कार्य सुचारू रूप से चल रहा है । राज्य सरकार के द्वारा इन विद्यालयों में किसी प्रकार का कार्य नहीं किया जा सकता है।
बताया जा रहा है की बीएसएल के इन बंद पड़े स्कूलों में से सेक्टर 12 C स्तिथ school में सेक्टर-12 थाना खुल गया है, और सेक्टर 2 स्तिथ स्कूल में लकड़ी का गोदाम बना हुआ है। एयरपोर्ट से काटे जा रहे पेड़ इसमें रखे जा रहे है। बोकारो शहर के यह जर्जर होते स्कूल का वैल्यूएशन अगर कराया जाये तो करीब सौ करोड़ के आसपास होगा। एक तरफ राज्य में जहां उच्च शिक्षा संस्थानों का घोर आभाव है, वही बोकारो में इंफ्रास्ट्रक्चर और बिल्डिंग बेकार पड़े हुए है। हर साल शहर से हज़ारो बच्चो को बाहर दूसरे राज्य में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाना पड़ता है।
बीएसएल प्रबंधन ने इनको बचाने या पुनः चालू करने को लेकर अबतक कोई निति निर्धारण नहीं की है। जो विधायक ने कहा मुझे बर्दास्त नहीं हो रहा है।
