Bokaro: पिछले डेढ़ साल से बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) प्रबंधन मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए अपनी 25 एकड़ जमीन का कब्जा जिला प्रशासन को देने के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है की प्रसाशन जमीन को ले ही नहीं रहा है। यहां तक की प्रशासनिक अधिकारी इस पर हो रहे पत्राचार पर सकारात्मक प्रतिक्रिया भी नहीं दे रहे।
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की इकाई बीएसएल प्रबंधन में इस बात पर हड़कंप मचा हुआ है। क्योंकि बीएसएल प्रबधन को समझ नहीं आ रहा है वह ऐसी स्तिथि में उस जमीन का क्या करें। जब मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए जमीन हस्तांतरित करने की मंजूरी इस्पात मंत्रालय दें चूका है और जिला प्रशासन इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।

बता दें, 2016 में जिला प्रसाशन ने ही सेक्टर-12 थाना अंतर्गत रणविजय कॉलेज के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-23 पर जमीन की पहचान की थी। बात यह हुई थी की बीएसएल प्रबंधन 25 एकड़ भूमि राज्य सरकार को उपलब्ध कराएगा, जिस पर वह मेडिकल कॉलेज का निर्माण और संचालन करेगी। पर सरकार बदली और परियोजना ठन्डे बस्ते में चली गई।
बताया जा रहा है कि तत्कालीन सरकार द्वारा कैबिनेट मीटिंग में बोकारो में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की गई थी। उसके बाद, पूर्व डीसी, बोकारो ने 2016-17 में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए 25 एकड़ जमीन मांगते हुए बीएसएल को प्रस्ताव भेजा था। बीएसएल प्रबंधन ने भी प्रस्ताव को तुरंत सेल बोर्ड को भेजा। जहा से अप्रूवल के बाद उस प्रस्ताव को इस्पात मंत्रालय भेज कर अनुमति ली गई।
सेल से 2019 में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए जमीन हस्तांतरण की मंजूरी मिलने के बाद बीएसएल प्रबंधन ने जिला प्रशासन को जमीन का कब्जा लेने के लिए कहा पर सकारात्मक जवाब नहीं मिला। उसके बाद से बीएसएल जमीन देने के लिए लगतार संघर्ष कर रहा है। अब तक बीएसएल ने जिला प्रसाशन को तीन अनुरोध पत्र भेजे है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इस संबंध में बीएसएल द्वारा पहला पत्र डीसी, बोकारो को 14 अक्टूबर 2019 को, दूसरा पत्र 09 मई 2020 को और तीसरा पत्र 25 जुलाई 2021 को भेजा गया था।
हैरानी की बात यह है कि पूर्व डीसी, बोकारो ने बीएसएल से पहले दो पत्र प्राप्त करने के बाद अलग ही प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के मामले को देखने के लिए अंचल अधिकारी, चास को अधिकृत कर दिया और फिर इस मामले में चुप्पी साध ली। बीएसएल को भी इस मामले में अंचल अधिकारी से आगे का पत्राचार करने को कहा गया। हालांकि बीएसएल प्रबंधन प्रशासन का पीछे लगा रहा और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कई दौर की चर्चा की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
बीएसएल द्वारा जिला प्रशासन को भेजे गए पत्र और मेडिकल कॉलेज प्रोजेक्ट से जुड़े तथ्यों को आज राष्ट्रीय अंग्रेजी अख़बार “टाइम्स ऑफ़ इंडिया” ने लिखा है। बीएसएल द्वारा जिला प्रसाशन को भेजे गए पत्र में यह लिखा गया है -: “संदर्भ: आपका पत्र नं। 560 दिनांक 08.03.2021। झारखंड सरकार द्वारा एमसीआई मानकों के अनुसार मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के निर्माण / स्थापना के लिए झारखंड सरकार को 25 एकड़ बीएसएल भूमि हस्तांतरण के संबंध में सेल बोर्ड की स्वीकृति और इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार की अनुमति प्राप्त की गई है”।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि “डीसी, बोकारो ने पहले सर्कल अधिकारी, चास को सेक्टर -12 (तत्कालीन ग्राम पिपरातर, थाना संख्या 36) में उपरोक्त 25 एकड़ बीएसएल भूमि पर कब्जा करने के लिए अधिकृत किया है। ६२९, दिनांक १८.०३.२०२० (प्रतिलिपि संलग्न) इस संबंध में कृपया हमारी टेलीफोन पर चर्चा के साथ-साथ हमारे जीएम (टीए – रेव और एलआरए) की चर्चा को सेक्टर -1 में एसडीओ, बोकारो के गोपनीय प्रकोष्ठ के परिसर में याद करें। आपसे अनुरोध है कि सेक्टर-12 में बीएसएल की उक्त 25 एकड़ जमीन को जल्द से जल्द अपने कब्जे में ले लें”।
बोकारो के भाजपा विधायक बिरंची नारायण ने 2 अगस्त को राज्य के स्वास्थ्य सचिव से मिलकर मेडिकल कॉलेज निर्माण कराने को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्वास्थ सचिव को बताया कि राज्य सरकार द्वारा मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए पहले ही बजट आवंटन किया जा चूका है। पर शायद विधायक को इस बात का इल्म नहीं था की मेडिकल कॉलेज की चिन्हित भूमि जिला प्रसाशन ने अभी तक लिया ही नहीं है। जब तक जमीन नहीं होगी तो कॉलेज बनेगा किस पर। पढ़िए विधायक द्वारा स्वास्थ सचिव को दिए गए पत्र जिसमे लिखा है की “जिला प्रसाशन ने 25 एकड़ भूमि में दखल प्राप्त कर लिया है” :
मेडिकल कॉलेज का निर्माण इस जिले के निवासियों के लिए एक सपना है। जो धीरे-धीरे उनके सेंटीमेंट्स में उतर गया है। मेडिकल कॉलेज खुलने को लेकर थोड़ी सी भी सुगबुगाहट बोकारो के लोगो के कान खड़े कर देती है। बोकारो के हो रहे विकास में मेडिकल कॉलेज की चर्चा सबसे पहले हुई थी, यानि एयरपोर्ट और स्टेडियम से भी पहले। पर आज यह अधर में अटकी है। मेडिकल कॉलेज बोकारो के लिए ड्रीम प्रोजेक्ट है, जो झारखंड के चार प्रमुख शहरों में से एक है। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स, नर्सेज और स्टूडेंट्स को हर वह सुविधा बोकारो में मिल सकती है जो किसी विकसित शहर में होती है।
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने बीएसएल प्रबंधन ने बालीडीह क्षेत्र में 20 एकड़ जमीन झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (जेएससीए) को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के लिए सौंपी है। इस बीच बोकारो हवाईअड्डे का वाणिज्यिक उड़ान संचालन के लिए विस्तार किया जा रहा है।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए गए इंटरव्यू में बोकारो के डिप्टी कमिश्नर (डीसी) कुलदीप कुमार ने कहा है कि, “मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। लेकिन हां, अगर यही स्थिति है। तो मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि का कब्जा अगले कुछ दिनों के भीतर निश्चित रूप से बीएसएल द्वारा ले लिया जाएगा। मैं इससे संबंधित अधिकारी को निर्देश दे रहा हूं “।

