Bokaro: बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) के टाउनशिप में हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए अब विस्थापितों ने प्रधानमत्रीं नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। विस्थापितों ने शहर के बीचो-बीच स्तिथ ‘पिकनिक गार्डन’ को अतिक्रमण से बचाने के लिए प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है। इस गार्डन को लोग खंडाला पार्क के नाम से भी जानते है।
2000 -01 तक शहरवासी इस गार्डन में घूमने जाया करते थे। पर आजकल इसकी स्तिथि काफी ख़राब है। यह पार्क बीएसएल के अफसर कॉलोनी कहे जाने वाले सेक्टर-4 /F से भी सटा हुआ है। बोकारो विस्थापित रैयत संघ द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र में यह बताया गया है कि यह ‘पिकनिक गार्डन’ बीएसएल के 20 एकड़ भूमि पर एमजीएम स्कूल के विपरीत सेक्टर-8 में स्तिथ है।

इस गार्डन के चारो तरफ चारदीवारी है। जिसे तोड़कर लोगों द्वारा अवैध निर्माण किया जा रहा है। इस गार्डन के हो रहे अतिक्रमण को अगर नहीं रोका गया तो SAIL-BSL को इससे हाथ धोना पड़ेगा। इस पार्क का अस्तित्व खत्म हो जायेगा। बोकारो विस्थापित रैयत संघ का कहना है कि इस पार्क में हो रहे अतिक्रमण के सम्बन्ध में बीएसएल के अधिकारियो को वह कई बार कह और लिख चुके है पर आजतक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसलिए उन्होनें “माननीय प्रधानमंत्री जी से अनुरोध किया है की इस ‘पिकनिक गार्डन’ को बचा लीजिये”। महासचिव भगवान प्रसाद साहू ने कहा कि, प्रधानमंत्री को पत्र भेजने से पहले बोकारो विस्थापित रैयत संघ ने ‘पिकनिक गार्डन’ के हो रहे अतिक्रमण की जानकारी पत्र भेजकर बीएसएल के डायरेक्टर इंचार्ज, ईडी और जीएम को भी दी थी। पर कोई कार्रवाई न होता देख, विस्थापितों ने प्रधानमत्रीं को लिखकर इससे अवगत कराया है।
बोकारो टाउनशिप के खाली पड़ी जमीनों पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) की फजीहत बीते कई सालो से हो रही है। पिछले कुछ महीनो से अतिक्रमण का विरोध विस्थापित और खुल कर करने लगे है। विस्थापितों का कहना है कि उन्होंने अपनी जमीनें बीएसएल को प्लांट लगाने के लिए दी थी न की अतिक्रमण करवाने और फ्री में लोगो को बसाने। बीएसएल प्रबंधन भले ही टाउनशिप में हज़ारो एकड़ भूमि पर हुए अतिक्रमण को हलके में ले रहा हो। पर इससे विस्थापित बहुत दुखी है।
विस्थापितों का मानना है की उनके द्वारा दी गई पुरखो की ज़मीन पर बीएसएल के अधिकारी अतिक्रमण करवा रहे है। बोकारो टाउनशिप के अधिकतर हिस्से में खाली पड़ी जमीनों पर अतिक्रमण हो चूका है या हो रहा है। बीएसएल के अधिकारी आँखे मूंदे हुए है। बीएसएल प्रबंधन के ऐसे रवैये से क्षुब्ध होकर अब विस्थापितों ने अपनी खाली पड़ी ज़मीन वापस मांगनी शुरू कर दी है। जो बीएसएल के विस्तारीकरण के लिए सबसे बड़ी बाधा है। विस्थापितों का बीएसएल से विश्वास उठ चूका है।
विस्थापितों का यह भी मानना है की बीएसएल के डायरेक्टर इंचार्ज हो या एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (P&A) या सेल का कोई आला अधिकारी, यह लोग कभी अतिक्रमण के मामले में कोई भी सख्त कदम नहीं उठाते है। जिसके चलते बोकारो टाउनशिप में ज़मीन का अतिक्रमण बदस्तूर जारी है। इनको कंपनी की सम्पति (Assets) या कहे राष्ट्र की सम्पति की कोई परवाह नहीं है। उच्च अधिकारी न तो अतिक्रमण रोकते है, न अतिक्रमणकारियों पर सख्त क़ानूनी कार्रवाई करते है और न अपने ही उन अधिकारियो पर कार्रवाई करते है जो अतिक्रमण रोकने सम्बंधित डिपार्टमेंट में फेलियर साबित हो रहे है।
बीएसएल के जमीनों की हो रही लूट पर अधिकारियो का इस तरह आंखें मूंदे रखना कंपनी के विस्तारीकरण के रास्ते में आने वाली बाधा का सबसे बड़ा कारण है। बीएसएल का ब्यान मिलने पर इस रिपोर्ट में लगा दिया जायेगा…..
बोकारो के शहरवासियों के मनोरंजन के लिए पार्क बनवाया गया था। इस पार्क का नाम लोगों ने खंडाला पार्क रख दिया। देख-रेख के अभाव में अब यह पार्क भैंसों का तबेला बन गया है। कई एकड़ में फैले इस पार्क में चारों तरफ गाय-भैंस बंधे दिखते हैं। जगह-जगह गोबर का ढेर और उपले नजर आते हैं। यहां अगर कोई गलती से घुस गया, तो गोबर के दुर्गंध से तुरंत बाहर निकल भागता है। प्रबंधन न तो इसकी देखरेख कर रहा है, ना ही इसे डेवलप कर रहा है।
