Bokaro: कायस्थों ने चित्रगुप्त पूजा आज सोमवार को बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया। कोरोना को देखते हुए अधिकतर कायस्थों ने घर पर ही कलम-दवात की पूजा पुरे विधि-विधान के साथ की। चित्रगुप्त महाराज की तस्वीर/मूर्ति की पूजा कर कायस्थों ने उनको अक्षत्, फूल, मिठाई, फल आदि चढ़ाया। इस पावन दिन पर कायस्थों ने अपनी किताब, कलम, दवात आदि चित्रगुप्त जी के समक्ष रख पूजा की।
हलाकि पुरे ज़िले में कई जगह कायस्थ महापरिवार द्वारा चित्रगुप्त पूजा मनाई गयी। पर चक्की मोड़ स्थित दुर्गा मंडप के प्रांगण में संपन्न हुई चित्रगुप्त महापरिवार सेक्टर-3 और सिटी सेंटर की संयुक्त पूजा की बात ही निराली थी। इस अवसर पर सभी स्थानीय चित्रांश ने अपने आराध्य भगवान श्री चित्रगुप्त की पूजा अर्चना कोरोना के SOP का पालन करते किया।

समिति के अध्यक्ष भइया प्रीतम ने कहा कि यह पूजा बोकारो जिले की प्रथम सार्वजनिक पूजा है जो 1973 से आज तक अनवरत जारी है। करोना के इस महामारी में हम सब इस जंग में राज्य और केंद्र सरकार के साथ हैं। तथा जब तक दवाई नहीं तब तक ढिलाई नहीं के सिद्धांतों का पालन करते हुए सादगी के साथ पूजा संपन्न कर रहे हैं।

महिला जिलाध्यक्ष डॉक्टर मीरा सिन्हा ने कहा कि भगवान चित्रगुप्त हम सब यही मनाते हैं कि कोरोना जल्द से जल्द इस देश से खत्म हो और पूरे समाज में अमन-चैन और शांति का वातावरण हो। ताकि पुनः अगले वर्ष हम लोग धूमधाम से सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ इस पूजा को संपन्न कर सके।
इस अवसर पर समिति के महासचिव राज श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष राजेश कुमार लाल, कोषाध्यक्ष कुंदन सिन्हा, सचिव पवन सिन्हा, विराज श्रीवास्तव, रंजन सिंहा, डॉक्टर आलोक, अरविंद सिन्हा, संजय सिन्हा, पंकज सिन्हा, नीरज सिन्हा, रिचा प्रीतम, नीरू राज, रीता सिन्हा, हिमांशु कुमार सिन्हा, सुदीप सिन्हा आदि हर्षोल्लास के साथ पूजा में सम्मिलित हुए।
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जानें कौन है महाराज चित्रगुप्त
चित्रगुप्त भगवान का जन्म ब्रह्मा जी के चित्त से हुआ था। इनका कार्य प्राणियों के कर्मों के हिसाब किताब रखना है। मुख्य रूप से इनकी पूजा भाई दूज के दिन होती है। इनकी पूजा से लेखनी, वाणी और विद्या का वरदान मिलता है। चित्रगुप्त जी का विवाह भगवान सूर्य की पुत्री यमी से हुआ था, इसलिए वह यमराज के बहनोई हैं। यमराज और यमी सूर्य की जुड़वा संतान हैं।
इस पूजा का खास महत्व कायस्थों में माना जाता ह। क्योंकि कायस्थों की उत्पत्ति चित्रगुप्त से मानी जाती है। इसके लिए उनके लिए यह पूजन काफी विशेष माना जाता है। मान्यता के मुताबिक महाभारत में शर-शैया पर पड़े पितामह भीष्म ने भगवान चित्रगुप्त का विधिवत पूजन किया था जिससे उन्हें मुक्ति मिल सके। इसके लिए यह पूजन बल, बुद्धि, साहस और शौर्य के लिए काफी अहम माना जाता है।
चित्रगुप्त की पूजा करने से साहस, शौर्य, बल और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
माना जाता है कि कोई भी कायस्थ दिवाली से कलम स्पर्श नहीं करता है। चित्रगुप्त भगवान के पूजन के पश्चात ही वह कलम स्पर्श करेगा। श्री चित्रगुप्त के वंश में स्वामी विवेकानंद, महर्षि महेश योगी, राजेन्द्र प्रसाद, लाल बहादुर शास्त्री, फिराक गोरखपुरी, अमिताभ बच्चन और हजारों महान हस्तियां इसी वंश से आती हैं।
