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भाषा संस्कृति पर अतिक्रमण, अब बर्दास्त नहीं: झारखंडी भाषा संघर्ष समिति


Bokaro: झारखंडी भाषा संघर्ष समिति ने कहा कि 30 जनवरी का जो मानवश्रृंखला नगेन मोड़ से लेकर महुदा मोड़ बिनोद विहारी तक बनाई गई थी वह झारखंड के इतिहास मे सुनहरे अक्षरो में लिखा जायेगा। झारखंड बनने के 21 साल बाद भी यह के स्थानीय निवासी शोषण के शिकार हो रहे है लगातार हमारी भाषा संस्कृति पर अतिक्रमण किया जा रहा है। उसी का नतिजा है कि आज बोकारो-धनबाद मे  क्षेत्रीय भाषा के रूप मे मगही, भोजपुरी को शामिल कर भाषा पर अतिक्रमण करने का काम हो रहा है। जिसे यहां की झारखंडी जनता बर्दास्त नहीं करेगी ।

झारखण्ड की यह धरती वीर बिरसा मुंडा, विनोद बिहारी, ए के राय ,शहीद निर्मल महतो की धरती है। जनता संघर्ष करने से कभी पिछे नहीं हटेगी। सरकार को इस मुद्दे में झुकना पड़ेगा। झारखंडी जनता अपने हक अधिकार के लिए सड़क सेे सदन तक लड़नें के लिए तैयार है। सभी चारो राजनितिक पार्टी अपने स्वार्थ कि राजनितिक कर रहे है, इनको जनता से कोई मतलब नहीं रखती है।

इस मानव श्रृंखला को आयोजित करने सेे पहले ही बार-बार सोशल मिडिया के माध्यम से अगाह किया जाता रहा है कि कोई भी पार्टी के नेता, वर्तमान या पूर्व विधायक या सांसद झंडा लेकर नहीं आयेगे, बावजूद रविन्द्र राय झंडा लेकर कार्यक्रम में पहुँच गए थे। झारखंडी भाषा संघर्ष समिति के बैनर तले जाहेरगढ़ सेक्टर 4 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया गया था।

इस प्रेस कॉनफ्रेंस में राजेश महतो, दयामय महतो , सचिन महतो,अरविन्द सिंह राजपूत, निमाई महतो,अरविन्द कुमार, विजय सिंह, सोहराय हांसदा , घनश्याम महतो, प्रमोद कुमार महतो, प्रदीप कुमार महतो,अजीत कुमार महतो, प्रफुल महतो इत्यादि उपस्थित रहे।
झारखंडी भाषा संघर्ष समिति।


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