Bokaro: सावन की रिमझिम फुहारों के बीच बोकारो की बसेरा कुंज बिहार कॉलोनी शुक्रवार को उल्लास और उमंग से सराबोर हो गई। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सजकर सावन महोत्सव को एक सांस्कृतिक उत्सव का रूप दे दिया। माहौल में हरियाली की खुशबू और लोकगीतों की मिठास घुल गई।
“सावन हमारी जड़ों से जुड़ने का महीना है”
दीपक देवी ने कहा, “सावन केवल ऋतु नहीं, हमारी संस्कृति की आत्मा है। यह हमें प्रकृति, परंपरा और आस्था से जोड़ता है।” नूतन वर्मा ने मुस्कुराते हुए जोड़ा, “जब आसमान बरसता है, धरती हरियाली से मुस्कराती है और हम महिलाएं गीतों के जरिए इसे मनाते हैं।”

शिव भक्ति और सामाजिक सौहार्द का संगम
महिलाओं ने सावन के गीतों पर थिरकते हुए भगवान शिव की आराधना की। प्रतिमा सिंह बोलीं, “यह महीना भोलेनाथ को समर्पित है। हम जलाभिषेक कर शिव से सुख-शांति की कामना करते हैं।” संजू सिंह ने कहा, “सावन में प्रकृति खिलती है, खेत लहराते हैं और महिलाएं एक-दूसरे की खुशी में शामिल होकर समाज को जोड़ने का काम करती हैं।”
मनोरंजन के साथ पर्यावरण का संदेश
कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने नृत्य, गीत और मनोरंजक प्रतियोगिताओं से सबका मन मोह लिया। डाली चौधरी ने कहा, “सावन हमें आपसी भाईचारे का पाठ पढ़ाता है।” समापन पर सभी महिलाओं ने एक स्वर में पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लिया। पुष्पा सिंह ने कहा, “आज अगर हमें पृथ्वी को बचाना है तो पर्यावरण के प्रति सजग होना ही होगा।” मौके पर उपस्थित थीं ज्योति कुमारी, रागिनी सिंह, चंदा कुमारी, खुशबू कुमारी, स्वीटी सिंह, रूपम कुमारी, रुबी कुमारी समेत दर्जनों महिलाएं।
