बोकारो में आयोजित GGSESTC सम्मेलन में देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों के प्रोफेसरों ने कहा—“AI से नहीं डरिए, उसे साथी बनाइए।” विशेषज्ञों ने बताया कि आने वाला दशक कृत्रिम बुद्धिमत्ता का है, जो शिक्षा और इंजीनियरिंग दोनों को नई दिशा देगा। शिक्षकों ने तकनीक को अपनाने और खुद को अपडेट करने का आह्वान किया।
हर क्षेत्र में AI का बढ़ता प्रभाव
बोकारो के कदरा स्थित गुरु गोविंद सिंह एजुकेशनल सोसाइटी टेक्निकल कैंपस (GGSESTC) में शुक्रवार को आयोजित “रिसेंट ट्रेंड्स इन साइंस, टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट” विषयक सम्मेलन में देशभर के तकनीकी विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाला दशक पूरी तरह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का होगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) समेत देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों के प्रोफेसरों ने बताया कि एआई अब इंजीनियरिंग के हर क्षेत्र में समाहित हो चुका है, जिससे शिक्षा की दिशा और चुनौती दोनों बदलने वाली हैं।
शिक्षकों के लिए चुनौती, छात्रों के लिए अवसर
भारतीय तकनीकी शिक्षा समाज (ISTE) के कार्यकारी सचिव एस.एम. अली ने कहा कि आने वाला समय एआई आधारित शिक्षण का है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे एआई से डरने के बजाय अपनी शिक्षण तकनीकों को उन्नत करें ताकि वे भविष्य की शिक्षा प्रणाली के अनुरूप खुद को ढाल सकें।
पारंपरिक कक्षा से डिजिटल हाइब्रिड मॉडल की ओर
सम्मेलन में प्रोफेसरों ने कहा कि “चॉक और डस्टर” आधारित पारंपरिक क्लासरूम अब पर्याप्त नहीं रह गए हैं। आज के छात्र गूगल और चैटजीपीटी जैसे डिजिटल संसाधनों से लैस हैं, इसलिए शिक्षकों को और अधिक तैयार रहना होगा। एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने कहा, “भविष्य की कक्षा हाइब्रिड होगी — जहां डिजिटल टेक्नोलॉजी और आमने-सामने की बातचीत दोनों का मेल होगा।”

छात्रों में आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने की जरूरत
एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बैंकॉक के अनुभव साझा करते हुए एमआईटी मुजफ्फरपुर के प्राचार्य एम.के. झा ने बताया कि वहां छात्र कक्षा से पहले ही सभी अध्ययन सामग्री प्राप्त कर लेते हैं, जिससे कक्षा का समय प्रश्नोत्तर और संवाद के लिए प्रयोग होता है। उन्होंने कहा, “भारत के तकनीकी संस्थानों को भी इस मॉडल को अपनाना चाहिए ताकि शिक्षण अधिक संवादात्मक और व्यावहारिक बने।”
शोध और शिक्षण में एआई एक सहयोगी साधन
आईआईटी धनबाद के एसोसिएट प्रोफेसर ए.के. चौधरी ने कहा कि एआई को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि एक सहायक उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए, जो शोध, डेटा विश्लेषण और पाठ्यक्रम डिजाइन को सरल बनाता है। उन्होंने कहा, “शिक्षा की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि हम एआई को शिक्षण पद्धति के साथ कितनी कुशलता से जोड़ पाते हैं।”
GGSESTC जल्द बनेगा विश्वविद्यालय
संस्थान के सचिव एस.पी. सिंह ने बताया कि GGSESTC ने स्वायत्त दर्जे के लिए आवेदन किया है और जल्द ही इसे विश्वविद्यालय में बदलने का लक्ष्य रखा गया है। यह झारखंड में अनुसंधान और नवाचार को एक नया मंच प्रदान करेगा।
21 प्राध्यापकों को मिला सम्मान
GGSESTC इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक प्रियदर्शी जरूहर ने बताया कि बिहार और झारखंड के 21 प्राध्यापकों को तकनीकी शिक्षा में उत्कृष्ट योगदान के लिए बेस्ट टीचर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

