Bokaro: बोकारो रेलवे स्टेशन के समीप स्थित गुड्स शेड (Good Shed) में कोयले के विशाल भंडार में लगी आग का मामला शुक्रवार को एक बार फिर चर्चा में आ गया। जिला प्रशासन के अनुसार आग इतनी भयावह थी कि उसे पूरी तरह काबू में करने में अग्निशमन विभाग को 30 दिनों से अधिक समय लग गया। लगातार मशक्कत के दौरान एक अग्निशमन चालक की तबीयत भी बिगड़ गई।
इस बीच दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के जनरल मैनेजर अनिल कुमार मिश्रा के एकदिवसीय दौरे के दौरान जब उनसे इस मामले में सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि गुड्स शेड में कोयला एक निर्धारित समय तक ही स्टॉक किया जा सकता है। निर्धारित अवधि से अधिक कोयला रहने पर ‘पेनल चार्ज’ लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि कोयले की गुणवत्ता रेलवे की जिम्मेदारी नहीं है। जहां तक कोयले के ढेर में आग लगने और अधिक स्टॉकिंग का सवाल है, इसकी जानकारी उन्हें पहले नहीं थी, लेकिन अब मामला संज्ञान में आने के बाद इसकी जांच कराई जाएगी और कंपनियों द्वारा स्टॉक अवधि व पेनल चार्ज का आकलन कराया जाएगा।
प्रशासन का दावा: बड़ा नुकसान टला
जिला प्रशासन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि 6 अक्तूबर 2025 को बोकारो रेलवे स्टेशन (Bokaro Railway Station) के पास स्थित गोदावरी कोयला डिपो में भीषण आग लग गई थी। जहरीले धुएं और धूल के बीच दमकलकर्मी लगातार 30 दिनों तक मौके पर डटे रहे और आग को पूरी तरह नियंत्रित किया। इस प्रयास से आसपास के गांवों को प्रदूषण (Pollution) से बचाया गया और सरकार को करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व नुकसान (Revenue Loss) से भी बचाया गया। अग्निशमन अधिकारी के अनुसार, इस दौरान मुख्य अग्निशमन चालक महमूद अंसारी को अत्यधिक श्रम और तनाव के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ा, जिनका इलाज अभी जारी है।

बताया जा रहा है कि आग लगने के समय गुड्स शेड (Good Shed) में अनुमानित 60 हजार टन से अधिक कोयला स्टॉक था। बोकारो के इस गुड शेड से हर महीने औसतन 17 से 18 रेक कोयला भेजा देश के विभिन पावर प्लांटों (Power Plants) में भेजा जाता है। एक रेक में करीब 3800 से 4200 टन कोयला होता है, जो लगभग 300 ट्रकों के बराबर माना जाता है।
800 करोड़ की आमदनी वाला प्रमुख केंद्र
बताया गया कि बोकारो रेलवे स्टेशन के पास स्थित यह गुड्स शेड सीसीएल (CCL) की खदानों से आने वाले कोयले का प्रमुख केंद्र है, जहां से मालगाड़ियों के जरिए देशभर के पावर प्लांटों को आपूर्ति की जाती है। आद्रा रेल मंडल का यह सबसे बड़ा व्यावसायिक केंद्र बन चुका है, जिससे रेलवे को सालाना 800 करोड़ रुपये से अधिक की आमदनी होती है।

