Bokaro: सेल की इकाई बोकारो स्टील प्लांट (BSL) नए साल में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। इस पहल से न केवल बोकारो बल्कि पूरे झारखंड और पड़ोसी राज्यों के मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है। बीएसएल के नवनियुक्त निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन ने बोकारो जनरल अस्पताल (BGH) के बर्न यूनिट को वर्ष 2026 तक अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने का निर्णय लिया है।
बोकारो से भेजी गई टीम
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत बोकारो और राउरकेला से डॉक्टरों व सिविल इंजीनियरों की चार सदस्यीय टीम गठित की गई है, जिसे देश के प्रमुख बर्न केयर केंद्रों का अध्ययन करने के लिए भेजा गया है। टीम का नेतृत्व बीजीएच के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अनिंदा मंडल कर रहे हैं। टीम AIIMS दिल्ली सहित अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में जाकर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, उन्नत उपकरण, प्रबंधन प्रणाली और इलाज से जुड़े प्रोटोकॉल का अध्ययन कर रही है, ताकि इन्हें बीजीएच में लागू किया जा सके।
रिपोर्ट देने के पहले मुंबई जाएगी टीम
टीम में बोकारो सिविल विभाग के आयुष्मान समंता, राउरकेला स्टील प्लांट अस्पताल की प्लास्टिक सर्जन डॉ. रूबी सिंह और इंजीनियर प्रदीप्तो मंडल शामिल हैं। जनवरी में टीम राष्ट्रीय बर्न सेंटर, मुंबई का भी दौरा करेगी। इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट बीएसएल प्रबंधन को सौंपी जाएगी। इसके साथ ही AIIMS दिल्ली के साथ एमओयू कर टेलीमेडिसिन सुविधा शुरू करने की योजना पर भी काम चल रहा है, जिससे बीजीएच के डॉक्टरों को विशेषज्ञ सलाह मिल सकेगी।

टॉप मैनेजमेंट की सोच है कि
वर्तमान में बीजीएच का 12 बेड वाला बर्न यूनिट आधुनिक हाईटेक सुविधाओं के अभाव में गंभीर मरीजों के इलाज में सीमित है। प्रस्तावित उन्नयन के तहत आधुनिक आईसीयू, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, स्किन बैंक और प्रशिक्षित मानव संसाधन की व्यवस्था की जाएगी, जिससे निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी। निदेशक प्रभारी के साथ-साथ सेल के टॉप मैनेजमेंट की सोच है कि बीजीएच का बर्न सेंटर देश के टॉप फाइव में शामिल हो। इसके सेल-बीएसएल पर्याप्त बजट देने के लिए भी तैयार हैं। प्लांट में दुर्घटनाओं के दौरान अक्सर कर्मी बर्न इंजरी का शिकार होते हैं, ऐसे में यह बर्न सेंटर उनके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं होगा।
बीएसएल के चीफ ऑफ़ कम्युनिकेशन मणिकांत धान ने बताया कि मोस्ट मॉडर्न बर्न यूनिट बनाने पर प्रबंधन विचार कर रहा है। इसी प्रक्रिया में विशेषज्ञों के एक दल को एम्स दिल्ली भेजा गया है। अध्ययन के बाद वो रिपोर्ट जमा करेंगे जिसपर प्रबंधन अपना विचार रखेगी।

