Bokaro: मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के अवसर पर बेरमो अनुमंडल स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हथिया पत्थर (Hathia Pathar) में बुधवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अहले सुबह से ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया, जिससे पूरा धाम जयकारों और भक्ति गीतों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
यह शिला एक प्राचीन राजा से जुड़ी है, जिसे श्राप..
फुसरो–जैनामोड़ मार्ग के समीप दामोदर नदी के तट पर स्थित हथिया पत्थर धाम अपनी हाथी के आकार की विशाल शिला के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यह शिला एक प्राचीन राजा से जुड़ी है, जिसे श्राप के कारण पत्थर में बदल दिया गया था। मकर संक्रांति पर यहां चादर चढ़ाने, नदी में स्नान करने और विशेष पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। See Video-
इससे क्रोधित होकर श्राप पड़ा..
एक श्रद्धालु ने अपनी मां से सुनी पीढ़ियों पुरानी कथा को साझा करते हुए बताया कि कई सदियों पहले एक राजा अपने पुत्र की बारात लेकर इसी स्थान से जा रहा था। उस दौरान नदी बेहद उफान में थी। राजा ने सुरक्षित पार करने के लिए नदी से प्रार्थना की। नदी से मन्नत मांगी कि लौटने पर वह बलि अर्पित करेगा। नदी का जल शांत हो गया, लेकिन राजा अपनी मन्नत भूल गया। इससे क्रोधित होकर श्राप पड़ा और राजा सहित पूरी बारात पत्थर में परिवर्तित हो गई। तभी से स्थानीय लोग इन प्राचीन कथाओं और परंपराओं का सम्मान करते हुए नदियों के विशाल पत्थरो की पूजा की परंपरा निभाते आ रहे हैं।

कबूतर उड़ाना शुभ..
स्थानीय श्रद्धालु मनोज महतो ने बताया कि यह पूजा वर्षों पुरानी परंपरा है, जिसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी निभाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यहां केवल सफेद बकरे या मुर्गे की बलि दी जाती है। वहीं जानकी देवी ने बताया कि पूजा के दौरान कबूतर उड़ाना शुभ माना जाता है।
हथिया पत्थर आस्था और विश्वास का केंद्र
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती की गई तथा यातायात और विधि-व्यवस्था पर लगातार नजर रखी गई। अधिकारियों के अनुसार शांतिपूर्ण पूजा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए थे। अनुशासन के साथ हुए आयोजन ने हथिया पत्थर धाम को एक बार फिर आस्था और विश्वास का केंद्र बना दिया।

