Bokaro: कसमार प्रखंड के मंजूरा गांव में सदियों पुरानी लोक परंपरा बेझाबिंधा (पारंपरिक तीरंदाजी प्रतियोगिता) का भव्य आयोजन पूरे विधि-विधान और उत्साह के साथ किया गया। यह प्रतियोगिता केवल खेल आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण संस्कृति, आस्था और विरासत का जीवंत उत्सव बनकर उभरी। आयोजन स्थल पर सुबह से ही ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
प्रतियोगिता में झरमुंगा गांव के हरिजन टोला निवासी बनेश करमाली के पुत्र पिंटू करमाली ने शानदार निशानेबाजी का प्रदर्शन करते हुए केले के खंभे को भेदकर विजेता बनने का गौरव हासिल किया। उल्लेखनीय है कि पिंटू इससे पूर्व भी चार वर्ष पहले इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के विजेता रह चुके हैं, जिससे उनकी प्रतिभा एक बार फिर साबित हुई।
ग्रामीणों के अनुसार, 125 वर्षों के लंबे इतिहास में यह पहला अवसर है जब उद्घाटन के दौरान ही लक्ष्य भेदा गया हो। बताया गया कि इस परंपरा की शुरुआत स्वर्गीय रीतवरण महतो ने की थी, जिसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी निभाया जा रहा है। प्रतियोगिता में प्रतिभागी 101 डेग की दूरी से केले के खंभे पर तीर चलाते हैं। विजेता को पुरस्कार स्वरूप एक वर्ष के लिए धान की जमीन दी जाती है। आयोजन में सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति ने इसे यादगार बना दिया।


