Bokaro: जिस फ्लाई ऐश (छाई) युक्त पानी के घुस जाने से रात में गांव में बाढ़ आ गई और लोगों को घर छोड़कर जान बचाने के लिए भागना पड़ा। उस घटना की जिम्मेवार बोकारो पावर सप्लाई कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (BPSCL) पर लगाए गए 2.05 करोड़ फाइन को झारखण्ड राज्य प्रदूषण नियंत्रण विभाग (JSPCB) वसूलना भूल गया। विडंबना देखिए जो मामला पिछले साल विधानसभा में गूंजा था, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) ही उस मामले में ‘ढिलाई’ बरत रहा है। लोगों के निगाह में प्रदूषण विभाग की कार्यशैली गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
BPSCL की 685 दिनों की अनदेखी, 2.05 करोड़ का जुर्माना
बताया जा रहा है कि, 685 दिनों तक पर्यावरण और प्रदूषण से जुड़े नियमों को ताक पर रखने के बावजूद BPSCL ने अब तक फाइन का एक धेला भी नहीं चुकाया है। अक्टूबर 2022 में पहली बार 71.32 लाख का जुर्माना प्रस्तावित था, जिसके बाद भी कंपनी नहीं संभली और 12 April 2025 को JSPCB द्वारा दुबारा जुर्माना लगाया गया। इस बार जुर्माने की रकम बढ़कर 2.05 करोड़ हो गई। लेकिन उस फाइन को वसूलने के लिए प्रदूषण विभाग कोई सख्त कदम नहीं उठाया। जो अप्रत्यक्ष रूप से BPSCL को राहत पहुंचने जैसा प्रतीत होता है। BPSCL ने भी इन घटनाओ में संलिप्त किसी ठेकेदार या अधिकारी पर कोई कठोर एक्शन नहीं लिया।
नदियों में घुल रहा ‘जहर’, दांव पर पर्यावरण
BPSCL के फ्लाई ऐश पोंड (Fly Ash Pond) से निकलने वाला दूषित पानी न केवल बोकारो स्टील प्लांट के कूलिंग पोंड को बर्बाद कर रहा है, बल्कि आउटफॉल-3 के रास्ते सीधे गरगा और फिर दामोदर नदी में मिल रहा है। विधानसभा के सत्र में भी विधायक सरयू राय (MLA Saryu Roy) ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया था। जांच कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि छह में से चार पोंड भर चुके हैं और अल्ट्रा-फाइन छाई के कण पानी के ऊपर तैर रहे हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विनाशकारी हैं।

जनसुनवाई में दिखा था आक्रोश
आने वाली गर्मी में फ्लाई ऐश पोंड के आसपास गांव जैसे राउतडीह, महेशपुर, महुआर आदि में रहनेवाले विस्थापित ग्रामीणों के लिए छाई किसी जहर से कम नहीं है। हवा में छाई उड़ती है। कभी-कभी उस धूल में उनका सांस लेना दूभर हो जाता है। हाल ही में बीएसएल (BSL) के विस्तारीकरण (Expansion) को लेकर प्रदूषण विभाग द्वारा आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा था, जिसके कारण सुनवाई आधी में बंद करनी पड़ी थी। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना था कि जब तक बीपीएससीएल के प्रदूषण पर लगाम नहीं लगाती, वे किसी नए प्रोजेक्ट को स्वीकार नहीं करेंगे।
BPSCL पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया था, जो..
जेएसपीसीबी (JSPCB) के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी से पूछने पर, उन्होंने कहा कि, “पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के चलते BPSCL पर 2.05 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा (EC) लगाया गया है। जिसे अभी तक कंपनी ने नहीं दिया है। इस मामले पर विभाग नजर रखे हुए है और कंपनी से कम्प्लाइंस करवा रही है।”
BPSCL के सीईओ का ब्यान
इस मामले में BPSCL के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) से पूछने पर उन्होंने कहा कि चुकी वह नए आये है इसलिए ‘फाइन’ के मामले उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वह पता करेंगे। लेकिन फिलहाल फ्लाई ऐश पोंड से छाई का उठाव जारी है। जितना छाई का उत्पादन हो रहा है। उससे अधिक का उठाव हो रहा है। वहाँ से निकलने वाला पानी भी साफ़ है और किसी भी प्रकार का कोई भी प्रदूषण नहीं हो रहा है।

