Bokaro: गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के दिन सार्वजनिक स्थल पर नशे की हालत में हंगामा करना झारखंड की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं को महंगा पड़ गया। बोकारो मॉल स्थित पीवीआर सिनेमा में हुए इस घटनाक्रम ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था की स्थिति को चुनौती दी, बल्कि संबंधित पार्टी की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए। मामला जब सीधे एसपी बोकारो हरविंदर सिंह के संज्ञान में आया तो पुलिस ने तत्काल सख्त कार्रवाई करते हुए सभी को थाने पहुंचाया। हालांकि घटना के बाद से पीवीआर के स्टाफ दहशत में है।

हवाला देते हुए अंदर जाने से रोक दिया
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पार्टी के करीब 10 कार्यकर्ता बोकारो मॉल के पीवीआर सिनेमा में फिल्म ‘बॉर्डर’ देखने पहुंचे थे। सुरक्षा जांच के दौरान पीवीआर के प्रवेश द्वार पर तैनात कर्मियों ने उन्हें नशे की हालत में पाया और कंपनी के नियमों का हवाला देते हुए अंदर जाने से रोक दिया। इस पर कार्यकर्ता भड़क गए और सुरक्षा कर्मियों से तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। आरोप है कि उन्होंने धक्का-मुक्की करते हुए जबरन लॉबी में प्रवेश कर लिया।
कार्यकर्ता उलझ गए
स्थिति को बिगड़ता देख पीवीआर के अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे और ऑडी-2 के गेट के सामने खड़े होकर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन कार्यकर्ता उलझ गए और गाली-गलौज पर उतर आए। माहौल तनावपूर्ण होता देख पीवीआर प्रबंधन ने तत्काल स्थानीय थाने को सूचना दी। इसी दौरान एसपी बोकारो अचानक मौके पर पहुँच गए और पूरे मामले की गंभीरता को समझते हुए मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को सभी को बाहर ले जाने का निर्देश दिया।

उनका क्या कसूर है
इसके बाद पुलिस सभी कार्यकर्ताओं को मॉल के नीचे लेकर आई, जहां भी काफी देर तक हंगामा होता रहा। वहां मौजूद लोगों की भीड़ तमाशा देखने जुट गई। कार्यकर्ता पुलिस से यह कहते नजर आए कि वे केवल फिल्म देखने आए थे और उनका क्या कसूर है, टिकट के पैसे कौन लौटाएगा ? उन्होंने टिकट ऑनलाइन बुक कराया है। सिटी थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस सभी को थाने ले गई।
सीसीटीवी में रिकॉर्ड
वहीं पीवीआर मैनेजर ने बताया कि आधिकारिक बयान के लिए वे अधिकृत नहीं हैं, लेकिन पूरी घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड है और पुलिस को फुटेज सौंप दी जाएगी। हालांकि घटना के बाद से पीवीआर के स्टाफ दहशत में है।
एसपी की त्वरित कार्रवाई की सराहना
आम जनता ने की पुलिसिया कार्रवाई की सराहना की। मॉल के सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर परिवार, महिलाएं और बच्चे आते हैं, ऐसे में नशे की हालत में प्रवेश वर्जित है। स्थानीय लोगों ने एसपी की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अधिक जिम्मेदार होना चाहिए। यदि एसपी साहब मौके पर मौजूद नहीं होते, तो आम आदमी के लिए इन दबंगों का सामना करना मुश्किल हो जाता।
कोशिश की गई, पर पुलिस विभाग की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। बयान प्राप्त होते ही उसे समाचार में शामिल कर लिया जाएगा।


