Bokaro: बोकारो की एक अदालत ने कानून के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है और शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है। एक नाबालिग लड़की के साथ कथित छेड़छाड़ के मामले की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने आरोपों को झूठा पाए जाने के बाद 70 साल के आदमी को दोषमुक्त कर दिया, और साथ ही शिकायतकर्ता के खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश दिया।

अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय सह विशेष न्यायाधीश (POCSO) देवेश कुमार त्रिपाठी की अदालत ने पोक्सो एक्ट के एक मामले में गोमिया निवासी 70 वर्षीय वृद्ध को दोषमुक्त करते हुए रिहा करने का आदेश दिया है। यह मामला वर्ष 2024 का है, जिसमें पड़ोसी द्वारा पोक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि वृद्ध ने शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी के साथ छेड़खानी की है।
स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर (SPP) पोक्सो कोर्ट रविशंकर चौधरी ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में बड़ा मोड़ तब आया, जब सूचक और उसकी नाबालिग बेटी ने कथित यौन अपराध की घटना पर चुप्पी साध ली। जिसके बाद अभियोजन ने उन्हें पक्षद्रोही (Hostile) घोषित किया। सुनवाई के क्रम में कोर्ट ने पाया कि पीड़ित का पिता होने के नाते, शिकायतकर्ता ने सभी तरह की झूठी जानकारी दी और आरोपी के खिलाफ एक फालतू शिकायत की, जो एक सीनियर सिटीजन है और उसका पड़ोसी है, जिससे उसने अपने गलत मकसद के लिए कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है। शिकायतकर्ता ने स्वयं यह स्वीकार किया कि उसने झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

SPP ने बताया कि अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के उद्देश्य से बने विशेष कानून का गलत इस्तेमाल किया गया, जिससे न केवल एक वरिष्ठ नागरिक को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी, बल्कि न्यायालय का कीमती समय भी व्यर्थ हुआ।
अदालत ने इस गंभीर दुरुपयोग को देखते हुए निर्देश दिया है कि सूचक के बयान की प्रति संलग्न करते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम), बोकारो के समक्ष आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई जाए, ताकि पोक्सो एक्ट की धारा 22 के तहत उसके विरुद्ध कार्रवाई की जा सके। साथ ही सीजेएम से मामले में विधिसम्मत आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया गया है।


