Bokaro: भारतीय रेल ने दक्षिण पूर्व रेलवे के तहत महत्वपूर्ण रेल अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें बारबेंदा–डमरुघुटु दोहरीकरण और डमरुघुटु–बोकारो स्टील सिटी तीसरी एवं चौथी लाइन शामिल हैं। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत Rs 815.32 करोड़ है।
भीड़भाड़ घटाने और क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम
नई मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं का उद्देश्य रेल मार्गों पर भीड़भाड़ को कम करना, लाइन क्षमता बढ़ाना, सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करना और यात्री व माल परिवहन को तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है। पश्चिम बंगाल और झारखंड में स्थित ये परियोजनाएं दक्षिण पूर्व रेलवे के प्रमुख क्षमता विस्तार कार्यक्रम का हिस्सा हैं और भारत के ऊर्जा, खनिज एवं सीमेंट कॉरिडोर के लिए महत्वपूर्ण हैं।
वर्तमान रेल खंड की स्थिति
वर्तमान में बारबेंदा–डमरुघुटु खंड एकल लाइन है और कोटशिला से बोकारो स्टील सिटी तक दोहरी लाइन उपलब्ध है। इस मार्ग पर प्रतिदिन 78 ट्रेनें (38 यात्री और 40 मालगाड़ियां) चलती हैं। माल ढुलाई क्षमता 35.22 मिलियन टन प्रतिवर्ष है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि परियोजना शुरू नहीं हुई, तो वर्ष 2028–29 तक इस खंड का उपयोग 132% तक पहुंच जाएगा।

औद्योगिक और राष्ट्रीय महत्व
यह परियोजना सेंट्रल कोलफील्ड्स (CCL), सीमेंट एवं इस्पात संयंत्र, हिंदुस्तान और भारत पेट्रोलियम डिपो (BPCL), तथा बोकारो स्टील सिटी (BSL) के औद्योगिक केंद्रों से संपर्क मजबूत करेगी। क्षमता विस्तार से ऊर्जा लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक उत्पादन और राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता में सुधार होगा।

