Bokaro: झारखण्ड के बोकारो ज़िले के गोमिया प्रखंड में जंगली हाथियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए वन विभाग की टीमें लाउडस्पीकर से गांव-गांव घूमकर लोगों को सतर्क कर रही हैं। ड्रोन से जंगलों और हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, वहीं रात्रि गश्ती और लगातार पेट्रोलिंग तेज कर दी गई है। ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
दूसरों के पक्के छतों पर शरण लेने को मजबूर
पिछले सप्ताह हाथी हमलों में पांच लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। बीतें 25 दिनों में 7 लोगो की जान जा चुकी है। गोमिया के गांगपुर सहित जंगल से सटे गांवों में हालात इतने भयावह हैं कि लोग रात अपने घरों में सोने से डर रहे हैं। मिट्टी के घरों में रहने वाले परिवार बच्चों और महिलाओं के साथ दूसरों के पक्के छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं। ठंड के इस मौसम में खुले आसमान के नीचे रात बिताना ग्रामीणों के लिए बड़ी पीड़ा बन गया है। See Video-
पांच हाथियों के झुंड से सबसे अधिक खतरा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने पश्चिम बंगाल से 19 सदस्यीय विशेष टीम को बुलाया है। छह क्यूआरटी टीम भी तैनात की गई हैं, जो लगातार ग्रामीणों से संपर्क में हैं। डीएफओ संदीप शिंदे ने बताया कि क्षेत्र में करीब 42 हाथियों का दल विचरण कर रहा है, जो छोटे-छोटे झुंडों में बंट चुका है। लुगु पहाड़ी के जंगल में सक्रिय पांच हाथियों के झुंड से सबसे अधिक खतरा बना हुआ है।

अवैध खनन और वन अपराधों पर सख्त कार्रवाई
उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि जिला प्रशासन मानव–हाथी संघर्ष की घटनाओं को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है और तात्कालिक सुरक्षा के साथ-साथ दीर्घकालीन समाधान पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रभावित पंचायतों में सोलर लाइट, हाई मास्क लाइट और सोलर फेंसिंग की योजना बनाई जा रही है, जबकि हाथियों के पारंपरिक विचरण मार्ग को बाधित करने वाली अवैध खनन और वन अपराधों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। उपायुक्त ने हाथी हमले में मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाते हुए कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और स्थानीय समुदाय के संयुक्त प्रयासों से आगे किसी भी बड़ी घटना को रोकने के लिए लगातार निगरानी और समन्वित कार्रवाई जारी रहेगी।

