स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट का कंपनी के इस्पात दामों पर केवल मामूली असर पड़ेगा। कंपनी का कहना है कि वैश्विक हालात से कच्चे माल की लागत जरूर प्रभावित होगी, लेकिन बिक्री योग्य स्टील की कीमतों में बड़ा उछाल नहीं देखा जाएगा।

कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी
सेल के अनुसार, वह दुबई से चूना पत्थर (lime stone) जैसे कच्चे माल का आयात करती है। मौजूदा संकट के कारण इनका सीएफआर (कॉस्ट एंड फ्रेट) मूल्य लगभग 23–24 डॉलर प्रति टन से बढ़कर करीब 35 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया है। इसके बावजूद कंपनी का अनुमान है कि तैयार स्टील की कीमतों पर इसका असर मात्र 100 से 200 रुपये प्रति टन तक सीमित रहेगा।
आपूर्ति सुरक्षा पर कंपनी का फोकस
कंपनी प्रबंधन ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कीमत से अधिक महत्वपूर्ण कच्चे माल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसी को ध्यान में रखते हुए सेल ने मध्य पूर्व से आपूर्ति के लिए वैकल्पिक शिपिंग मार्गों की व्यवस्था शुरू कर दी है, ताकि किसी भी स्थिति में उत्पादन प्रभावित न हो।

घरेलू उत्पादन और आयात निर्भरता
सेल अपनी लौह अयस्क की जरूरत 100 प्रतिशत घरेलू कैप्टिव खदानों से पूरी करती है, जबकि कोकिंग कोयला मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे देशों से आयात किया जाता है। चूना पत्थर स्टील निर्माण प्रक्रिया में अशुद्धियों को हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे इसकी आपूर्ति बेहद अहम हो जाती है।
ईंधन आपूर्ति पर नियंत्रण और स्थिरता की उम्मीद
कंपनी ने यह भी बताया कि ईंधन आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों को पहले ही नियंत्रित कर लिया गया है। पीएनजी के उपयोग और एलपीजी भंडारण व्यवस्था को मजबूत कर स्थिति को संतुलित किया गया है। इसके चलते निकट भविष्य में स्टील की कीमतों में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है और बाजार पर बड़ा दबाव नहीं पड़ेगा।


