Bokaro: वर्ष 2025 में बोकारो स्टील लिमिटेड (बीएसएल) के प्रशासनिक भवन के सामने हुए प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति की मौत के मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने बीएसएल के पांच तत्कालीन अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। हाई कोर्ट के जस्टिस आर. मुखोपाध्याय की अदालत ने अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने का आदेश दिया।

अधिकारियों ने हाई कोर्ट में दी थी चुनौती
मामले में तत्कालीन प्रभारी निदेशक बीरेंद्र कुमार तिवारी, महाप्रबंधक हरि मोहन झा, कार्यकारी निदेशक राजश्री बनर्जी, जीएम आलोक चावला और आईआर विभाग के प्रभाकर कुमार ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
धरना-प्रदर्शन के दौरान हुई थी मौत
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में अप्रेंटिस संघ द्वारा अपनी मांगों को लेकर बीएसएल प्रशासनिक भवन के समक्ष बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन किया जा रहा था। प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाएं हुईं। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और सीआईएसएफ जवानों के बीच झड़प हो गई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

परिजनों ने लगाया था हत्या का आरोप
घटना के बाद मृतक के परिजनों ने बीएसएल अधिकारियों पर हत्या का आरोप लगाते हुए बोकारो स्टील सिटी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस प्राथमिकी में बीएसएल के कई वरिष्ठ अधिकारियों को नामजद बनाया गया था।
प्रदर्शनकारियों पर भी दर्ज हुए थे केस
दूसरी ओर, घटना के बाद उपद्रव और हिंसा को लेकर बीएसएल प्रबंधन तथा सीईओ बोकारो की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अलग-अलग दो प्राथमिकी दर्ज कराई गई थीं। सभी तथ्यों और पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने बीएसएल अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को निरस्त कर उन्हें राहत प्रदान की।

