Bokaro: चिन्मय विद्यालय बोकारो में मंगलवार को ‘व्यावसायिक नैतिकता के साथ कंप्यूटेशनल थिंकिंग एवं एआई’ विषय पर एक दिवसीय इन-हाउस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विद्यालय के शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और इसके नैतिक उपयोग के प्रति जागरूक करना था।

विद्यालय के अधिकारियों और शिक्षकों की रही उपस्थिति
कार्यशाला में विद्यालय के सचिव महेश त्रिपाठी, प्राचार्य सूरज शर्मा, वरीय उप प्राचार्य नरमेंद्र कुमार एवं उप प्राचार्य डॉ. रोशन शर्मा उपस्थित रहे। प्रशिक्षण सत्र में विद्यालय के एआई विभाग के अंकित सेन, अंजु, सोना लिसा एवं शुभेंदु ने मुख्य संसाधन व्यक्ति के रूप में शिक्षकों को विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। इसके अलावा ‘व्यावसायिक नैतिकता और सीपीआर’ विषय पर विद्यालय के मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार मनीष कुमार एवं चिकित्सा विभाग की रागिनी ने संयुक्त रूप से विशेष सत्र आयोजित किया।

शिक्षा में एआई और कंप्यूटेशनल थिंकिंग की उपयोगिता पर चर्चा

कार्यशाला के प्रथम सत्र में शिक्षकों को कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआई की मूल अवधारणाओं से अवगत कराया गया। संसाधन व्यक्तियों ने बताया कि किस प्रकार इन तकनीकों को वर्तमान शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़ा जा सकता है। सीबीएसई के नए सर्कुलर के संदर्भ में एआई और कंप्यूटेशनल थिंकिंग की बढ़ती उपयोगिता पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षकों ने उदाहरणों और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों को एआई की कार्यप्रणाली, संभावनाओं और कक्षा शिक्षण में इसके प्रभावी इस्तेमाल के तरीकों की जानकारी दी। संवादात्मक सत्र में एआई के नैतिक उपयोग, डेटा सुरक्षा और लेसन प्लानिंग में इसके समावेश पर विशेष जोर दिया गया।
व्यावसायिक नैतिकता, मानसिक स्वास्थ्य और सीपीआर पर प्रशिक्षण
कार्यशाला के दूसरे सत्र में मनीष कुमार और रागिनी ने शिक्षकों को व्यावसायिक नैतिकता, मानसिक स्वास्थ्य और प्राथमिक चिकित्सा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी। मनीष कुमार ने सदाचार, भावनात्मक नियंत्रण और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर चर्चा करते हुए शिक्षकों को सकारात्मक वातावरण तैयार करने के लिए प्रेरित किया। वहीं, चिकित्सा विभाग की रागिनी ने शिक्षकों को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) और फर्स्ट एड की जानकारी दी। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों में प्राथमिक सहायता देने के तरीकों को समझाया।
प्राचार्य सूरज शर्मा ने एआई के महत्व को बताया
कार्यशाला के समापन अवसर पर प्राचार्य सूरज शर्मा ने सभी संसाधन व्यक्तियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआई को शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने सीबीएसई द्वारा इन विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि एआई का व्यावसायिक नैतिकता के साथ सही उपयोग शिक्षा क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर सकता है। इससे विद्यार्थियों के ज्ञान और सीखने की क्षमता को एक नया विस्तार मिलेगा।

