Bokaro: बोकारो स्टील प्लांट (BSL) से निकलने वाले धुएं और बढ़ते वायु प्रदूषण का मामला अब झारखंड विधानसभा तक पहुंच गया है। बोकारो विधायक स्वेता सिंह ने विधानसभा सत्र के दौरान इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए सरकार और संबंधित एजेंसियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट (BSL) की चिमनियों से निकलने वाला धुआं आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

सदन में CREA के रिपोर्ट का हवाला
विधायक स्वेता सिंह ने सदन में सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि बोकारो में वायु प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की कि बोकारो स्टील प्लांट में आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण तकनीक लागू की जाए, कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम सुनिश्चित किया जाए तथा आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता की नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों पर वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाना चाहिए ताकि क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य की सही स्थिति का आकलन हो सके। See Video-
बच्चो और बुजुर्गो के लिए खतरनाक
बोकारो विधायक ने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट से निकलने वाला प्रदूषण खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। CREA की रिपोर्ट के अनुसार प्लांट से होने वाले उत्सर्जन का संबंध हर वर्ष बड़ी संख्या में स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ रहा है, जिससे न केवल लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है बल्कि आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।

Bokaro में समय से पहले जन्म
CREA रिपोर्ट के मुताबिक स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के बोकारो स्थित इस संयंत्र से निकलने वाले प्रदूषकों के कारण हर साल लगभग 270 कम वजन वाले बच्चों के जन्म और करीब 280 समय से पहले जन्म के मामलों से संबंध जोड़ा गया है। इसके अलावा बच्चों में अस्थमा के लगभग 25 नए मामले सामने आने की भी आशंका जताई गई है।
वयस्कों की मौत और गंभीर अस्थमा
CREA द्वारा वित्तीय वर्ष 2023 के लिए किए गए स्वास्थ्य प्रभाव आकलन (HIA) में यह भी बताया गया है कि प्लांट से निकलने वाले सूक्ष्म कण (PM2.5) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) जैसे प्रदूषकों के संपर्क में आने से हर साल लगभग 170 वयस्कों की मौत की आशंका रहती है। वहीं लगभग 290 लोग गंभीर अस्थमा से प्रभावित हो रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों के जीवन पर गंभीर असर पड़ रहा है।
कार्य दिवस और आर्थिक नुकसान
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वायु प्रदूषण के कारण हर साल लगभग 1.23 लाख कार्य दिवसों का नुकसान हो रहा है। इससे कामकाज प्रभावित होता है, उत्पादकता घटती है और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है। अनुमान के अनुसार वर्ष 2023 में इस प्रदूषण के कारण लगभग 79 मिलियन अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है।
बोकारो के सिंटर प्लांट में
यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारत मेंसिंटर प्लांट्स, मिल ज़ोन और रिफ्रैक्टरी मटेरियल प्लांट्स जैसी स्टील उत्पादन इकाइयों से होने वाले सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) उत्सर्जन के लिए कोई राष्ट्रीय मानक नहीं हैं, जबकि ये सभी SO2 उत्सर्जन के स्रोत के रूप में पहचाने जाते हैं. इसके अलावा, बोकारो स्टील प्लांट की अनुपालन रिपोर्ट्स के अनुसार, सिंटर स्टैक के छह डक्ट में से केवल दो में अधिक कुशल इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर्स (ESPs) लगे हुए हैं, जबकि बाकी में केवल पुराने साइक्लोन डस्ट कलेक्टर्स हैं, जो उन्हें कहीं अधिक प्रदूषणकारी बनाते हैं.
CREA की विश्लेषक अनुभा अग्रवाल ने बताया है कि बोकारो स्टील प्लांट का मामला इस्पात उद्योग से जुड़े पर्यावरणीय और स्वास्थ्य जोखिमों का एक गंभीर उदाहरण है। उनका कहना है कि प्रदूषण मानकों की कमजोरी और आंकड़ों में पारदर्शिता की कमी के कारण जवाबदेही भी कम दिखाई देती है। वहीं CREA के लीड एनालिस्ट लौरी माइलिवर्टा ने कहा कि भारत में इस्पात उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही प्रभावी उत्सर्जन नियंत्रण और स्वच्छ तकनीकों को अपनाने में अभी भी बड़ी कमी बनी हुई है।
We have taken note of the baseless claims and reports of CREA. The reports are based on based on modelled estimations and assumptions rather than scientific data based evidence. The report does not conduct source apportionment study. There are no credible medical records in the report to substantiate the false claims.
Manikant Dhan, chief of communication, BSL
Bokaro Steel plant operates strictly as per regulatory norms prescribed by statutory bodies. This report appears to have been published with a malafide intention and suitable steps will be taken to address the same. Also, a detailed response to the report will be issued shortly. In the meanwhile, we urge media to rely on credible sources of information only and not on sensational and misleading reports.

