Bokaro: ज़िले में अमृतसर–कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (Amritsar -Kolkata corridor) के तहत प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) पर झारखंड सरकार ने तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी है। विधायक श्वेता सिंह की मांग के बाद उद्योग मंत्री संजय यादव ने उच्चस्तरीय बैठक कर भूमि संबंधी बाधाओं के समाधान का निर्देश दिया। यह परियोजना हजारों रोजगार सृजित करने की क्षमता रखती है।

रांची के नेपाल हाउस, डोरंडा स्थित उद्योग मंत्री के कार्यालय में शुक्रवार को बोकारो में अमृतसर–कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) के को लेकर हुई बैठक की अध्यक्षता स्वयं उद्योग मंत्री संजय यादव ने की। उन्होंने परियोजना को लेकर स्पष्ट कहा, “यदि मेरे प्रयास से विकास में एक ईंट भी जुड़ सके, तो इसे मैं अपनी सफलता मानूंगा। IMC परियोजना राज्य की प्राथमिकता है, और इसे हर हाल में धरातल पर उतारा जाएगा।”
यह बैठक बोकारो की विधायक श्वेता सिंह द्वारा विधानसभा में उठाए गए गैर सरकारी संकल्प और उस पर हुई बहस के बाद आयोजित की गई थी। मंत्री ने सदन में आश्वासन दिया था कि “अगले ही दिन उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जाएगी,” और शुक्रवार को उन्होंने अपने वादे को पूरा किया। बैठक में विधायक श्वेता सिंह, उद्योग निदेशक, भूमि अभिलेख निदेशक, जियाडा के प्रबंध निदेशक, बोकारो के उपायुक्त, नगर प्रशासन के अधिकारी तथा बोकारो इस्पात संयंत्र के अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान SAIL-Bokaro Steel Plant (बीएसएल) द्वारा भूमि मूल्यांकन पर मंत्री ने कड़ी नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि स्टील सेक्रेटरी से बात कर समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “सेल विकास का साक्षी बने, बाधक नहीं।” विधायक श्वेता सिंह ने मंत्री का आभार जताते हुए कहा कि 2021 से भूमि संबंधी समस्याओं के कारण परियोजना ठप थी, जिससे बोकारो के युवाओं और उद्यमियों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि बैठक में यह सुनिश्चित किया गया कि अब परियोजना में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं होगी और भूमि मूल्यांकन को यथार्थपरक बनाया जाएगा।
विधायक ने यह भी कहा कि जल्द ही राज्य सरकार की टीम दिल्ली जाकर इस्पात मंत्री (steel minister) और सचिव (steel secretary) से मुलाकात करेगी, ताकि परियोजना को केंद्र स्तर पर तेजी मिले। उन्होंने बताया कि IMC परियोजना से बोकारो में 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष और लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे, जो पूरे झारखंड के औद्योगिक ढांचे को नई दिशा देंगे।
ज्ञात हो, 2021 में केंद्र सरकार ने बोकारो को अमृतसर–कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन नोड घोषित किया था। इसके लिए भूमि चयन की प्रक्रिया शुरू की गई। जिला प्रशासन ने बोकारो स्टील प्लांट (BSL), जो स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की इकाई है, से भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। योजना के अनुसार, BSL को यह जमीन राज्य सरकार के उद्योग विभाग को हस्तांतरित करनी थी। लेकिन BSL के असहयोग के कारण यह महत्वाकांक्षी परियोजना अटक गई है।
BSL ने निजी एजेंसी से मूल्यांकन कराकर जमीन का मूल्य करीब Rs 1,400 करोड़ निर्धारित किया है, जिसे राज्य सरकार देने को तैयार नहीं है। राज्य सरकार चाहती है कि जमीन का अधिग्रहण सरकारी दरों (सर्किल रेट) पर किया जाए और भुगतान कृषि, औद्योगिक या वाणिज्यिक जैसे सरकारी वर्गीकरण के आधार पर ही हो। हालांकि, BSL अपनी मांग पर अडिग है। फिलहाल राज्य स्तरीय समिति इस विवाद के समाधान पर काम कर रही है।

