बोकारो जनरल अस्पताल (BGH) का एमआरआई रूम इन दिनों सुर्खियों में है। दो दिन से मरीजों के लिए सेवाएं ठप हैं। वजह है: स्टाफ की लापरवाही से घटी एक खतरनाक घटना। मरीज के परिजन मेटल स्ट्रेचर लेकर एमआरआई कक्ष (MRI Room) में चले गए। शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र ने स्ट्रेचर को जोरदार तरीके से खींच लिया और वह प्रोजेक्टाइल की तरह एमआरआई (MRI) मशीन से टकरा गई।
मरीज सुरक्षित, पर मशीन को झटका
खुशकिस्मती से न्यूरो विभाग के बताए जा रहे मरीज को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। लेकिन स्ट्रेचर बुरी तरह मशीन से चिपक गई है और पिछले दो दिनों से वहीं अटकी हुई है। इस कारण एमआरआई मशीन लगातार बंद पड़ी है और मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

तकनीशियनों का इंतजार, खुद से हटाना खतरनाक
अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत सीमेंस कंपनी को सूचित किया है। कंपनी के तकनीशियनों ने आश्वासन दिया है कि वे जल्द ही आकर मशीन से स्ट्रेचर अलग करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना प्रशिक्षित तकनीशियन के धातु की वस्तु को हटाने की कोशिश बेहद खतरनाक हो सकती है। इससे न केवल मशीन को नुकसान होगा बल्कि जानलेवा हादसा भी हो सकता है।
कितना ताकतवर होता है एमआरआई का चुंबक
जानकारों के मुताबिक, आधुनिक एमआरआई मशीनों में 0.5 टेस्ला से 3.0 टेस्ला तक यानी 5,000 से 30,000 गॉस तक का चुंबकीय बल होता है। तुलना के लिए पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र मात्र 0.5 गॉस है। ऐसे में धातु की कोई भी वस्तु मशीन में पहुंचना गंभीर परिणाम ला सकती है। नियमों के बावजूद स्टाफ ने मरीज के परिजनों को धातु की स्ट्रेचर अंदर ले जाने से नहीं रोका। सौभाग्य से मरीज सुरक्षित बच गया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
लापरवाही बनी हादसे की वजह
हालांकि एमआरआई कक्ष में धातु (metal) की वस्तुओं के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध है, फिर भी अस्पताल के स्टाफ ने लापरवाही दिखाते हुए मरीज के परिजनों को धातु की स्ट्रेचर के साथ अंदर जाने से नहीं रोका। परिणामस्वरूप बड़ा हादसा होते-होते टल गया। सौभाग्य से मरीज सुरक्षित रहा, अन्यथा स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती थी। भारत के अन्य हिस्सों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां मरीज चुंबकीय शक्ति के कारण मशीन से चिपक गए और गंभीर रूप से घायल हो गए (Ref: https://timesofindia.indiatimes.com/city/raipur/chhattisgarh-woman-seriously-injured-after-getting-stuck-in-mri-machine/articleshow/42043632.cms)।
BGH प्रबंधन को पहले भी रेडियोलॉजी विभाग में स्टाफ की लापरवाही की शिकायतें मिली थीं, लेकिन चूंकि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ था, इसलिए अधिकारियों ने अनदेखी कर दी। यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि विभाग में उपस्थित कर्मचारियों और उनके सुपरवाइजर पर नियंत्रण की कमी है, जिसके कारण मरीज सेवाएं प्रभावित होती हैं और ऐसी गंभीर घटनाएं घटती हैं।
स्टाफ खामोश, प्रबंधन में हलचल
घटना के बाद अस्पताल का स्टाफ चुप्पी साधे हुए है, क्योंकि कार्रवाई का डर सता रहा है। वहीं, प्रबंधन फिलहाल मशीन को बहाल करने और तकनीशियनों के आने का इंतजार कर रहा है। जानकारी के अनुसार, यह मशीन 17 जून 2010 को अस्पताल में लगाई गई थी। यह सीमेंस की Avento 3.1T मॉडल मशीन है, जिसकी कीमत 7.3 करोड़ रुपये है। इसके जरिए मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और मस्क्युलो-स्केलेटल सिस्टम से जुड़ी गंभीर बीमारियों का पता लगाया जाता है।
बीएसएल की ओर से आधिकारिक बयान
बीएसएल के संचार प्रमुख मणिकांत धान ने कहा, “बीजीएच की एमआरआई मशीन में कल से तकनीकी समस्या आ गई है। मशीन की मरम्मत और सेवा बहाली के लिए जरूरी कदम तत्काल उठाए गए हैं। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में सामान्य सेवाएं फिर से शुरू हो जाएंगी।”
