Bokaro : बुधवार को गोपनीय स्थित कार्यालय कक्ष में उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा की अध्यक्षता में जिले के विभिन्न निजी विद्यालयों के प्राचार्यों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य निजी विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना था। बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) जगरनाथ लोहरा एवं अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, मानसिक स्वास्थ्य, नैतिक मूल्यों और भविष्य की दिशा तय करने में सहायक होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए।
फीस माफी के मामलों के निष्पादन हेतु वेलफेयर कमेटी का गठन
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि प्रत्येक निजी विद्यालय अपने स्तर पर फीस माफी अथवा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभिभावकों की शिकायतों के निष्पादन हेतु वेलफेयर कमेटी का गठन करें। इस कमेटी में विद्यालय प्रबंधन, अभिभावक प्रतिनिधि एवं शिक्षक प्रतिनिधि को शामिल किया जाए।

साथ ही, जिला स्तर पर उप विकास आयुक्त (डीडीसी) श्रीमती शताब्दी मजूमदार की अध्यक्षता में एक जिला वेलफेयर कमेटी गठित की जाएगी, जो प्राप्त आवेदनों/विवादित मामलों की सुनवाई कर पारदर्शी एवं समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करेगी। उपायुक्त ने कहा कि किसी भी अभिभावक के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। कमेटी प्राप्त आवेदनों की गोपनीयता भी सुनिश्चित करेगी।
शिक्षकों एवं कर्मियों के साथ गरिमामय व्यवहार सुनिश्चित करने का निर्देश
बैठक में निजी विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिया गया कि शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों, सफाई कर्मियों एवं अन्य सहयोगी स्टाफ के साथ सम्मानजनक एवं मानवीय व्यवहार किया जाए। सुरक्षित कार्य वातावरण एवं संस्थागत सम्मान सुनिश्चित करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। उपायुक्त ने कहा कि संतुष्ट एवं सुरक्षित शिक्षक ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकते हैं।
सीनियर छात्रों के लिए नियमित कैरियर काउंसलिंग
विद्यालयों को निर्देशित किया गया कि कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए नियमित कैरियर काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएं। इसमें विभिन्न प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों, स्किल डेवलपमेंट, उद्यमिता एवं उच्च शिक्षा के विकल्पों की जानकारी दी जाए। विद्यालयों को विशेषज्ञ काउंसलर, उद्योग जगत के प्रतिनिधि एवं सफल पूर्व विद्यार्थियों को आमंत्रित कर मार्गदर्शन सत्र आयोजित करने की सलाह दी गई।
आरटीई के तहत पारदर्शी नामांकन सुनिश्चित करने का निर्देश
उपायुक्त ने कहा कि राइट टू एडुकेशन एक्ट (आरटीई) के तहत 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन पूर्णतः पारदर्शी प्रक्रिया से किया जाए। किसी भी प्रकार की अनियमितता या भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।डीईओ एवं डीएसई को निर्देश दिया गया कि वे नियमित निरीक्षण कर नामांकन प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित करें।
पुस्तक सूची एवं यूनिफॉर्म मॉड्यूल वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से अपलोड
विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिया गया कि शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने से कम से कम 15 दिन पूर्व पुस्तकों की सूची एवं यूनिफॉर्म का निर्धारित मॉड्यूल विद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करें। इससे अभिभावकों को किसी एक विक्रेता से खरीददारी के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा और वे अपनी सुविधा अनुसार कहीं से भी सामग्री खरीद सकेंगे। यह कदम पारदर्शिता एवं अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।
नियमित पैरेंट्स-टीचर मीटिंग (पीटीएम) का आयोजन
विद्यालयों में नियमित अंतराल पर पैरेंट्स-टीचर मीटिंग (पीटीएम) आयोजित करने का निर्देश दिया गया। अभिभावकों को विद्यालय प्राचार्य के समक्ष अपनी समस्याएं, सुझाव एवं शिकायतें रखने का अवसर मिलना चाहिए। उपायुक्त ने कहा कि विद्यालय एवं अभिभावक के बीच संवाद ही विद्यार्थियों की प्रगति का आधार है।
छात्रवृत्ति योजनाओं में निजी विद्यालयों का निबंधन अनिवार्य
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि निजी विद्यालय भी सरकारी छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत अनिवार्य रूप से निबंधन कराएं। विद्यार्थियों को प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, गुरुजी क्रेडिट कार्ड सहित अन्य योजनाओं का लाभ दिलाना विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी है। इस संबंध में जिला कल्याण विभाग द्वारा आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।
नशा मुक्ति, यौन उत्पीड़न रोकथाम एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता
विद्यालयों में नियमित रूप से नशा मुक्ति अभियान, यौन उत्पीड़न से संरक्षण एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता विषयक कार्यशालाएं आयोजित करने का निर्देश दिया गया। शिक्षा विभाग अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर इन कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से संचालित करेगा।उपायुक्त ने कहा कि सुरक्षित एवं संवेदनशील विद्यालय वातावरण विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए अनिवार्य है।
सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का भ्रमण कर गुणवत्ता सुधार का आह्वान
निजी विद्यालयों के प्राचार्यों एवं शिक्षकों को जिले में संचालित सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस विद्यालयों का भ्रमण करने का सुझाव दिया गया, ताकि वे वहां की शैक्षणिक, प्रबंधन एवं अवसंरचनात्मक व्यवस्थाओं का अवलोकन कर विद्यालयों में श्रेष्ठ प्रथाओं को लागू करने – निजी विद्यालयों के तर्ज पर प्रदर्शन में सुधार का सुझाव संबंधित विद्यालयों को दें।
विद्यालय अवधि में संचालित कोचिंग संस्थानों पर सख्ती
बैठक में डीईओ एवं डीएसई को निर्देशित किया गया कि विद्यालय अवधि के दौरान संचालित कोचिंग संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि नियमित कक्षाओं के समय किसी भी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधि विद्यालयी अनुशासन को प्रभावित नहीं करे।
फीस संरचना में एक रूपता हेतु सुझाव किया आमंत्रित
उपायुक्त ने निजी विद्यालयों को निर्देश दिया कि वे अपनी फीस संरचना में पारदर्शिता एवं एकरूपता लाने हेतु ठोस सुझाव तैयार कर शिक्षा विभाग को समर्पित करें। उद्देश्य यह है कि शुल्क निर्धारण संतुलित, तर्कसंगत एवं अभिभावक हितैषी हो। बैठक के अंत में उपायुक्त श्री अजय नाथ झा ने सभी निजी विद्यालयों से अपेक्षा की कि वे दिए गए निर्देशों का गंभीरता से अनुपालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी, सुरक्षित एवं समावेशी शिक्षा व्यवस्था स्थापित करना है, जिसमें प्रशासन, विद्यालय प्रबंधन एवं अभिभावक – सभी की सहभागिता आवश्यक है।
मौके पर दिल्ली पब्लिक स्कूल, चिन्मया विद्यालय, डीएवी पब्लिक स्कूल, एमजीएम हायर सेकेंडरी स्कूल, श्री अयप्पा पब्लिक स्कूल आदि विद्यालयों के प्राचार्य/प्रतिनिधि आदि उपस्थित थे।

