Bokaro: शहर के विभिन्न इलाकों और सड़कों पर आवारा श्वानों (कुत्तों) के बढ़ते आतंक पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन रेस हो गया है। बुधवार को समाहरणालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त (DDC) शताब्दी मजूमदार ने बोकारो स्टील प्लांट (BSL) की ‘नगर सेवा’ विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। डीडीसी ने स्पष्ट किया कि जहां चास नगर निगम इस दिशा में सक्रिय है, वहीं बीएसएल प्रबंधन (BSL Management) ने अब तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया है।
नगर सेवा विभाग को
डीडीसी ने जिला पशुपालन पदाधिकारी को कड़े निर्देश दिए कि वे बीएसएल नगर सेवा के साथ तुरंत पत्राचार करें और बी.एस. सिटी क्षेत्र में सार्वजनिक श्वानों के लिए फिडिंग जोन व शेल्टर होम (आश्रय स्थल) चिन्हित कराएं। बैठक में यह बात उभरकर आई कि चास नगर निगम अक्टूबर माह से ही आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर काम कर रहा है, लेकिन बीएसएल प्रशासन अब तक सुस्त पड़ा है।
पालतू पशुओं का होगा पंजीकरण, नसबंदी के लगेंगे शिविर
बैठक में केवल आवारा ही नहीं, बल्कि पालतू पशुओं के प्रबंधन पर भी जोर दिया गया। डीडीसी ने राज्य मुख्यालय से मार्गदर्शन लेकर पालतू पशुओं के अनिवार्य पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, नगर निगम चास और नगर परिषद फुसरो के साथ मिलकर श्वानों की नसबंदी (ABC Program) और टीकाकरण के लिए नियमित शिविर लगाने को कहा गया है, ताकि वैज्ञानिक तरीके से इनकी संख्या नियंत्रित की जा सके।

पंचायतों में भी बनेगा ‘फीडिंग जोन’
डीडीसी ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जिला पंचायती राज पदाधिकारी को निर्देश दिया कि वे मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाएं। पंचायतों में भी पशुओं के लिए शेल्टर चिन्हित किए जाएंगे। शताब्दी मजूमदार ने दोटूक कहा कि एबीसी कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है, जिसमें बीएसएल जैसी बड़ी संस्थाओं को अग्रणी भूमिका निभानी होगी।

