Bokaro : बोकारो ट्रेजरी से दारोगा के वेतन मद में 20 महीनों के भीतर 3.15 करोड़ रुपये की संदिग्ध निकासी के मामले ने जिला प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। अपर समाहर्ता मो. मुमताज अंसारी की प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद उपायुक्त अजय नाथ झा ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं।

प्रारंभिक जांच में अनियमितता के संकेत
जांच रिपोर्ट में पाया गया कि उपेंद्र सिंह के नाम पर वेतन मद से की गई निकासी सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। इसमें गंभीर अनियमितता की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट मिलते ही उपायुक्त ने मामले को प्राथमिकता में रखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क कर दिया है।
खाते फ्रीज, विभागीय कार्रवाई की तैयारी
डीसी के निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी से कार्रवाई शुरू हो गई है। संबंधित व्यक्ति और उससे जुड़े खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है। मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए वित्त विभाग को अनुशंसा भेजने का निर्देश दिया गया है।

एसपी को सख्त कार्रवाई का निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए बोकारो पुलिस अधीक्षक को भी संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा गया है। प्रशासन ने भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही है।
कैसे हुआ खुलासा
झारखंड में सरकारी खजाने से वेतन मद में करोड़ों की अवैध निकासी का यह सनसनीखेज मामला प्रधान महालेखाकार (पीएजी) चंद्रमौली सिंह की गोपनीय रिपोर्ट से उजागर हुआ। यह रिपोर्ट वित्त सचिव प्रशांत कुमार को भेजी गई थी। ट्रेजरी निरीक्षण और डेटा विश्लेषण के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आईं।
वेतन से कई गुना अधिक निकासी
आमतौर पर एक पुलिस सब इंस्पेक्टर का मासिक वेतन करीब एक लाख रुपये होता है, लेकिन उपेंद्र सिंह के खाते से मई 2024 से दिसंबर 2025 के बीच औसतन 15 लाख रुपये प्रति माह से अधिक की निकासी हुई। हैरानी की बात यह रही कि 3.15 करोड़ रुपये की निकासी पर जीपीएफ में महज 61,668 रुपये की कटौती हुई, जबकि आयकर और टीडीएस की कोई कटौती नहीं की गई।
सिस्टम में भी मिली बड़ी खामी
जांच में यह भी सामने आया कि सिस्टम में सब इंस्पेक्टर का पे लेवल 7वें वेतन आयोग के लेवल-18 के बराबर दिखाया गया, जो संभव नहीं है। रिपोर्ट में पेरोल प्रोसेसिंग, पे एंटाइटलमेंट और वैलिडेशन में बड़े कंट्रोल गैप की बात कही गई है। साथ ही अन्य ट्रेजरी में भी एक ही अवधि का वेतन दो बार निकाले जाने की आशंका जताई गई है।

