Bokaro : अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) के तहत बोकारो में भूमि आवंटन को लेकर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। लोकसभा में सांसद ढुलू महतो के सवाल के जवाब में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री Jitin Prasada ने बताया कि अब तक झारखंड सरकार की ओर से बोकारो जिले में उपयुक्त जमीन की पुष्टि नहीं की गई है।

जमीन नहीं, तो प्रोजेक्ट नहीं:
सरकार ने साफ कहा है कि नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) के तहत जमीन उपलब्ध कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। जब तक झारखंड सरकार जमीन चिन्हित कर पुष्टि नहीं करती, तब तक AKIC के तहत बोकारो में किसी भी तरह का विकास कार्य शुरू नहीं किया जा सकता।
भथुआ की जमीन पर भी असमंजस:
सवाल में बोकारो स्टील प्लांट (SAIL) के अधीन भथुआ गांव में करीब 700 एकड़ खाली जमीन का जिक्र किया गया था। हालांकि, इस जमीन को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि या हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

स्टील मंत्रालय से समन्वय नहीं:
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि स्टील मंत्रालय के साथ इस जमीन को NICDC को ट्रांसफर करने को लेकर फिलहाल कोई ठोस अंतर-मंत्रालयी समन्वय नहीं हुआ है।
मास्टर प्लान भी अटका:
सरकार के मुताबिक, बोकारो के स्टील और कोयला क्लस्टर को AKIC से जोड़ने के लिए फिजिबिलिटी स्टडी और मास्टर प्लान तभी शुरू होंगे, जब जमीन पूरी तरह विवाद-मुक्त और उपलब्ध होगी।
रोजगार की उम्मीदों पर असर:
इस प्रोजेक्ट से स्थानीय स्तर पर रोजगार और औद्योगिक विकास की उम्मीदें जुड़ी थीं, लेकिन जमीन की अनिश्चितता के कारण फिलहाल इन पर ब्रेक लग गया है।

