Bokaro: बोकारो इस्पात संयंत्र में ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा ने हड़ताल का आगाज़ जितनी मजबूती से किया, उतनी मजबूती से बंदी कर नहीं पाया। बंदी के सुबह गुरुवार को करीब सौ के तादाद में आंदोलनकारियों बैनर और झंडे लेकर प्लांट गेट, एडीम बिल्डिंग आदि जगहों पर नारा लगाते नज़र आये, पर साइकिल-मोटरसाइकिल पर सवार कर्मचारी और ठेका मजदूर उनको अनदेखा कर प्लांट के अंदर काम करने चले गए। BSL मैनेजमेंट ने हड़ताल से निबटने के किये तैयारी कर रखी थी, पर आंदोलनकारियों की संख्या और प्रभाव देखते हुए वह सुबह ही नार्मल हो गए थे।
लोगो की माने तो दोपहर होते-होते तक प्लांट के आसपास हड़ताल करने वाले आठों NJCS ट्रेड यूनियनस के नेता और कुछ कार्यकर्ता ही बचे थे, जो बाद में धीरे-धीरे चले गए। जिन आठ ट्रेड यूनियनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल में भाग लिया था, वे हैं बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन (BSWU-INTUC) बोकारो इस्पात कामगार यूनियन (BIKU-AITUC) इस्पात मजदूर मोर्चा (IMM-CITU) क्रान्तिकारी इस्पात मजदूर संघ (KIMS-HMS) सेंटर ऑफ़ स्टील वर्कर्स (CSW-AICCTU) बोकारो कर्मचरी पंचायत- HMS , बोकारो इस्पात सेंट्रल वर्कर्स यूनियन (AIUTUC) और झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन (NTUI)। इसमें अधिकतर NJCS ट्रेड यूनियनस थे।


श्रम कानून के संसोधन और मजदूरों हितो से सबंधित मांगो के लिए की गयी राष्ट्रव्यापी हड़ताल बीएसएल में खास प्रभावी नहीं रही। लोगो के अनुसार इस हड़ताल ने उक्त आठों ट्रेड यूनियनस की शाख मैनेजमेंट के सामने कम कर दी है। मैनेजमेंट ने इन यूनियनस के जनाधार को नाप लिया है। कई अधिकारी तो कहते दिखे की फालतू में इतनी परेशानी झेलनी पड़ी। असल में बीएसएल प्रबंधन ने बुधवार को सर्कुलर निकाल सभी प्लांट कर्मी की छुट्टी कैंसिल कर दी थी। हड़ताल के दिन नहीं आने वालो के खिलाफ अनुसाशनात्मक कार्यवाही की बात कही थी। अधिकारियो को ड्यूटी से एक घंटे पहले बुलाया गया था।
बीएसएल के प्रवक्ता, मणिकांत धान के अनुसार आज हड़ताल के दिन ए-शिफ्ट, बी-शिफ्ट और सामान्य पाली में नियमित बीएसएल कर्मी की उपस्थिति लगभग 99 % रही। ठेका मज़दूरों की उपस्थिति भी सभी विभागों में सामान्य रही और उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा। अपने शेड्यूल के मुताबिक प्लांट के प्रत्येक इकाई में उत्पादन और अन्य काम-काज सामान्य दिनों की तरह जारी रहा। हालांकि CITU के बी डी प्रसाद ने कहा की कॉन्ट्रैक्ट मजदूर का सपोर्ट काफी मिला। वही KIMS के नेता राजेंद्र सिंह की माने तो वह पहरेदार बन मजदूरों के हितो की रक्षा के लिए जगते और जागते रहते है, मजदूर नहीं समझेंगे तो उनको आगे परेशानी होगी।

NJCS के नेतागण जो भी कहे पर मजदूरों और कर्मचारियों से उनका कनेक्ट कम होता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार बीएसएल का इंडस्ट्रियल रिलेशन (IR) डिपार्टमेंट, हड़ताल के कुछ दिन पहले से इन आठों NJCS यूनियनस से अधिक दो NON-NJCS ट्रेड यूनियनों पर नज़र बनाये हुए था। ये यूनियन थे क्रान्तिकारी इस्पात मज़दूर संघ (किम्स) और जय झारखंड मज़दूर समाज (JJMS)। कुछ साल पहले, 2 दिसंबर, 2015 में KIMS और JJMS द्वारा की गयी हड़ताल काफी प्रभावी रही थी, जिसका आकलन प्रबंधन ने किया हुआ था। भाजपा का भारतीय मज़दूर संघ भी हड़ताल से परे था।
बुधवार को JJMS के बी के चौधरी ने स्पष्ट कर दिया था कि वे न तो किसी भी कर्मचारी को हड़ताल में भाग लेने के लिए कहेंगे और न ही रोकेंगे। उन्होंने किया भी वही। JJMS के सभी मजदूर काम पर गए। वही KIMS के महासचिव संग्राम सिंह ने भी कह दिया था कि वे भाग नहीं लेंगे, क्योंकि उन्हें एनजेसीएस यूनियनों पर भरोसा नहीं है। NJCS यूनियनस श्रमिकों के लिए कुछ नहीं किया है। इन दोनों यूनियन के हड़ताल में नहीं रहने से इसका प्रभाव प्लांट में आज दिख रहा था।
