Bokaro: चास नगर निगम चुनाव इस बार एक सुखद तस्वीर पेश कर रहा है। चुनावी मैदान में 34 से 65 वर्ष तक के प्रत्याशी उतरकर यह संदेश दे रहे हैं कि लोकतंत्र में हर पीढ़ी की भागीदारी अहम है। यह मुकाबला युवा उत्साह और अनुभवी समझ के संगम के रूप में देखा जा रहा है।

न उम्र की सिमा हो
34 साल की निधि कुमारी मैदान में हैं, तो 65 साल के गोपाल मुरारका भी पूरी मजबूती से डटे हैं। बाकी 37, 38, 39, 40… से लेकर 63 तक की पूरी “एज रेंज” मौजूद है। ऐसा लग रहा है कि हर पीढ़ी अपनी-अपनी उपलब्धियों का बखान कर रही हो। तीस-चालीस की उम्र वाले प्रत्याशी बता रहे हैं कि उनके पास “नई सोच” है। पचास पार वाले कह रहे हैं कि “हमने बहुत देखा है।” चालीस-पैंतालीस वाले बीच में फंसे हैं- उन्हें साबित करना है कि वे न तो बहुत नए हैं, न बहुत पुराने। कुल 31 प्रत्याशियों में अधिकांश 40 से 55 के बीच हैं, यानी अनुभव और ऊर्जा दोनों एक साथ मैदान में आमने सामने है।
मैदान में खड़े प्रत्याशियों कि उम्र
निधि कुमारी (34), निमाई महतो (37), मो. फैजुद्दीन अंसारी (37), मोहम्मद रफीक अंसारी (38), अमर कुमार चौरसिया (39), अभय सिंह (39), उमेश ठाकुर (40), रीतुरानी सिंह (41), पंकज न कुमार राय (42), विनोद कुमार न (44), अविनाश कुमार (45), जमील अख्तर (45), सावित्री देवी (45), जयवीर सिंह (46), भोलू पासवान (46), अरविंद कुमार राय (47), जवाहर प्रसाद (48), प्रदीप वर्मन (49), विकास कुमार पांडेय (49), परिंद्र सिंह (51), अनिल कुमार वर्मा (52), गजेंद्र प्रसाद हिमांशु (52), राज किशोर गोप (52), डा. राज कुमार (52), अरविंद कुमार (55), राज कुमार (55), एहसानउल्लाह शाह (57), विनोद मंडल (62), साधु शरण गोप (63), मोहम्मद सुल्तान (63), गोपाल मुरारका (65)।

अलग-अलग पीढ़ियां अपने-अपने दृष्टिकोण और अनुभव के साथ आगे आई हैं। अब निर्णय मतदाताओं के हाथ में है कि वे किस सोच और नेतृत्व शैली को चास के भविष्य के लिए उपयुक्त मानते हैं। कमेंट करके बताएं

