Bokaro: चास नगर निगम चुनाव में जब मीटर नीचे जाता दिखा, तो राजनीति का ‘स्टार्ट बटन’ दबाने खुद मंटू यादव और रतनलाल मांझी मैदान में उतर आए। धर्मशाला मोड़ पर चुनावी कार्यालय का उद्घाटन कम, राजनीतिक रील शूट ज्यादा नजर आया। फीता कटते ही ऐसा लगा मानो चुनाव नहीं, किसी फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो गया हो – डायलॉग तैयार, कैमरा ऑन और किरदार पूरी तरह एक्टिव।
असली शो
उमेश ठाकुर मंच पर थे, लेकिन असली शो मंटू यादव और रतनलाल मांझी ने संभाला। दोनों नेता कभी कंधे पर हाथ रखकर भरोसा दिलाते दिखे, तो कभी भीड़ की ओर देखकर यह जताते रहे कि “चिंता मत कीजिए, हम हैं।” भाषणों में वही सदाबहार डायलॉग सुनाई दिए – जलजमाव, टूटी सड़कें, सफाई और पेयजल। फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार इन्हें “अबकी बार पक्का” वाले सुर में पेश किया गया।
तस्वीरें मजबूत आएं
उमेश ठाकुर का कार्यालय खुलते ही वार्डों में तूफानी दौरे शुरू हुए, जहां नुक्कड़ सभाओं में समस्याएं ऐसे गिनाई गईं, मानो नगर निगम में समस्या ही समस्या हो और समाधान सिर्फ उन्ही के पास हो। महिला समर्थकों की मौजूदगी से माहौल को रंग देने की पूरी कोशिश हुई – ताकि तस्वीरें मजबूत आएं और दावा और भी मजबूत लगे।

एक ही सवाल
अब चास की गलियों में एक ही सवाल घूम रहा है – क्या मंटू यादव और रतनलाल मांझी की यह ‘हाथ पकड़ राजनीति’ उमेश ठाकुर को जीत की लाइन तक पहुंचाएगी, या फिर यह चुनाव भी उद्घाटन, भाषण और पोस्टरों तक ही सीमित रह जाएगा ?

