Bokaro: फरवरी में होने वाले नगर निकाय चुनाव (Municipal Election) इस बार कई मायनों में अलग होने जा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) ने चुनावी प्रक्रिया को अधिक अनुशासित और नियंत्रित बनाने के उद्देश्य से ऐसे निर्णय लिए हैं, जिनका सीधा असर प्रत्याशियों की रणनीति और मतदाताओं के व्यवहार पर पड़ेगा।
सूत्रों के अनुसार एक ओर मतदान बैलेट पेपर से कराया जाएगा, वहीं दूसरी ओर मतदाताओं को ‘नोटा’ का विकल्प नहीं दिया जाएगा। इसका मतलब है कि हर मतदाता को किसी न किसी उम्मीदवार के पक्ष में ही मतदान करना होगा, जिससे मुकाबला और रोचक होने की संभावना है। पिछली बार हुए चास नगर निगम के चुनाव में 417 मतदाताओं ने NOTA पर वोट किया था।
दस लाख से कम आबादी वाले नगर निगमों में महापौर के लिए..
बताया जा रहा है कि निर्वाचन आयोग ने चुनावी खर्च को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बड़े नगर निगमों, जैसे रांची (Ranchi) और धनबाद (Dhanbad) में महापौर पद के उम्मीदवार अधिकतम 25 लाख रुपये तक ही खर्च कर सकेंगे। इन्हीं नगर निगमों में वार्ड पार्षद के लिए खर्च की सीमा पांच लाख रुपये तय की गई है। वहीं चास नगर निगम (Chas Nagar Nigam) जैसे दस लाख से कम आबादी वाले नगर निगमों में महापौर के लिए यह सीमा 15 लाख और वार्ड पार्षद के लिए तीन लाख रुपये होगी। नगर परिषद और नगर पंचायत स्तर पर खर्च की अधिकतम राशि इससे भी कम रखी गई है, ताकि छोटे निकायों में चुनावी प्रतिस्पर्धा धनबल पर निर्भर न रहे।

आयोग के इन फैसलों का उद्देश्य चुनावी खर्च में पारदर्शिता लाना है। पिछले चुनावों में यह देखा गया था कि कई प्रत्याशी वास्तविक खर्च का पूरा विवरण नहीं देते थे। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने निर्देश दिया है कि चुनाव की घोषणा के साथ ही जिला निर्वाचन पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में प्रचार सामग्री, वाहन, पोस्टर, बैनर और अन्य चुनावी मदों की दरें पहले से तय करेंगे। इससे खर्च का आकलन समान और निष्पक्ष तरीके से किया जा सकेगा।

