Bokaro: समाहरणालय सभागार में गुरुवार को उपायुक्त अजय नाथ झा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सीएसआर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में विभिन्न कंपनियों एवं बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस दौरान पिछली समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की बिंदुवार समीक्षा की गई तथा आगामी वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा हुई।

सीएसआर केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं
उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि कंपनियां अपने ऑपरेशनल एरिया के स्थानीय समुदाय की वास्तविक जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुरूप सीएसआर योजनाएं तैयार करें। उन्होंने कहा कि सीएसआर केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रभावी माध्यम है, जिससे क्षेत्रीय विकास और आमजन के जीवन स्तर में सुधार लाया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि जिला सीएसआर कमेटी से अनुशंसित एवं स्वीकृत योजनाओं को ही धरातल पर उतारा जाए। व्यक्तिगत सुविधा के आधार पर राशि खर्च करने की प्रवृत्ति से बचने को कहा।
सभी कंपनियों को औपचारिक पत्र
उपायुक्त ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए प्रस्तावित योजनाओं का विस्तृत एक्शन प्लान तीन दिनों के भीतर जिला सीएसआर नोडल पदाधिकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि मार्च के प्रथम सप्ताह में नए वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तावित सीएसआर कार्यों के संबंध में सभी कंपनियों को औपचारिक पत्र भेजा जाएगा।

रेड एवं ऑरेंज जोन
बैठक में रेड एवं ऑरेंज जोन क्षेत्रों में आजीविका सृजन, आधारभूत संरचना की कमी दूर करने तथा पर्यावरण, स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया। उपायुक्त ने विशेष रूप से गोमिया समेत हाथी प्रभावित प्रखंडों में टार्च-मशाल वितरण, मधुमक्खी पालन को बढ़ावा, बांस व अन्य वनस्पतियों का पौधरोपण, सोलर व हाई मास्ट लाइट लगाने जैसे कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा।
प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश
दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के तहत सीएसआर से ई-ट्राई साइकिल/स्कूटी एवं सहायक उपकरण वितरण तथा कौशल विकास से जोड़ने की पहल पर भी बल दिया गया। बैठक में उप विकास आयुक्त ने कंपनियों को जिले के चार पीवीजीटी गांवों को गोद लेने का सुझाव दिया। वहीं सीएसआर नोडल पदाधिकारी शक्ति कुमार ने प्रशासन की प्राथमिकताओं की जानकारी देते हुए उस आधार पर प्रस्ताव तैयार करने को कहा।

