Bokaro: बोकारो स्टील के टाउनशिप स्थित कचरा डंपिंग ग्राउंड में लगी आग ने आसपास के सेक्टरों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। डंपिंग यार्ड से उठ रहा घना सफेद धुआं पूरे इलाके में हवा के साथ फैल रहा है। प्रदूषण का स्तर चिंताजनक हो गया है। कई लोगों को धुंए के चलते आंखों में जलन का सामना करना पड़ रहा है। इस घटना ने एक बार फिर बीएसएल प्रबंधन की प्रशासनिक उदासीनता और कचरा प्रबंधन की बदहाल व्यवस्था की पोल खोल दी है।

धुआँ फैल रहा है
गर्मी बढ़ने के साथ कचरे में लगी आग से उठ रहा धुआं सेक्टर 6 व 8 तक पहुंच रहा है। कई लोगों ने बताया कि घरों की खिड़कियां बंद रखनी पड़ रही हैं। सेक्टर 6, सेक्टर 8 और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग घुटन भरे माहौल में जीने को मजबूर हैं। सेक्टर 11 से सेक्टर 6 को जोड़ने वाली सड़क पर भी धुआं राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। राहगीर मुंह पर रुमाल रखकर निकलने को विवश हैं। चार पहिया वाले शीशा बंद कर उस सड़क से जा रहे है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से आग पर तुरंत काबू पाने की मांग की है। See Video –
मवेशी प्लास्टिक और सड़े-गले कचरे दिखाई दिए
कचरा डम्पिंग ग्राउंड का सबसे शर्मनाक दृश्य वह है, जहां आग और धुएं के बीच मवेशी प्लास्टिक और सड़े-गले कचरे को चरते दिखाई देते हैं। यह सिर्फ पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। खुले में डंपिंग, बिना सुरक्षा और बिना किसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के कचरे का अंबार – क्या यही ग्रीनटेक अवार्ड से नवाजी गई महारत्न कंपनी SAIL-BSL के टाउनशिप का असली चेहरा है ?

मवेशियों की मौत
बोकारो टाउनशिप के डंपिंग ग्राउंड में कचरा प्रबंधन में लगे एक क्रेन ऑपरेटर ने पूछने पर बताया कि, “यहां बड़ी संख्या में मवेशी कचरा खाते हैं। वे प्लास्टिक और सड़ा-गला अपशिष्ट निगल लेते हैं। कई मवेशियों की मौत भी हो जाती है। उनके पेट के अंदर से भारी मात्रा में प्लास्टिक निकलता है।”
कोई व्यवस्था नहीं
करीब सात एकड़ में फैले इस बाउंड्रीविहीन डंपिंग ग्राउंड में प्रतिदिन लगभग 80 मीट्रिक टन कचरा डाला जाता है। टाउनशिप में 600 डस्टबिन और 228 सफाई मित्रों के जरिये 36 हजार घरों और बाजारों से कचरा एकत्र कर इसी स्थल पर फेंक दिया जाता है। लेकिन उसके बाद क्या? न कोई ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र, न कचरे का पृथक्करण, न वैज्ञानिक निस्तारण। खुले में सड़ता कचरा और फिर लगती आग – यह सिलसिला नया नहीं है, लेकिन समाधान अब भी गायब है।
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
वर्ष 2015 में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निरीक्षण के दौरान यहां बायोमेडिकल कचरा मिलने पर नोटिस जारी किया था। तब भी ये कहते हुए ये चेतावनी दी गई थी कि यह पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। बावजूद इसके, हालात जस के तस हैं। वर्ष 2023 में एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र लगाने की घोषणा की गई थी। घोषणा हुई, सुर्खियां बनीं, लेकिन जमीनी हकीकत में कुछ नहीं बदला।
घोर लापरवाही
यह महज एक आग नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता की आग है। यह धुआं सिर्फ कचरे से नहीं, बल्कि लापरवाही, अनदेखी और टालमटोल की नीति से उठ रहा है। जब तक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की वैज्ञानिक और स्थायी व्यवस्था नहीं होती, तब तक यह संकट बार-बार लौटेगा। बीएसएल के संचार प्रमुख मणिकांत धान ने बताया कि आग बुझाने के लिए पानी का टैंकर लगाया गया है और क्रेन से कचरे को हटाकर आग को फैलने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है।

