Bokaro: सेल के बोकारो स्टील प्लांट (BSL) ने स्वच्छ और हरित इस्पात उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए फोर्बेस मार्शल प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता किया है। इस परियोजना के तहत ब्लास्ट फर्नेस-1 में हाइड्रोजन गैस इंजेक्शन तकनीक लागू की जाएगी, जो स्टील उद्योग में कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में अहम पहल मानी जा रही है। बोकारो स्टील प्लांट (BSL) सेल के अंतर्गत आने वाला पहला प्लांट है, जहां हाइड्रोजन गैस इंजेक्शन का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।

कार्बन उत्सर्जन में कमी का प्रभाव
पारंपरिक रूप से इस्पात उत्पादन में कोयले (coal) और अन्य कार्बन आधारित ईंधनों का उपयोग होता है, जिससे भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जित होती है। नई तकनीक में हाइड्रोजन का उपयोग एक स्वच्छ और प्रभावी रिड्यूसिंग एजेंट के रूप में किया जाएगा, जो कार्बन की आंशिक जगह लेगा और उत्सर्जन को काफी हद तक घटाएगा।
राष्ट्रीय मिशन से जुड़ी पहल
यह पायलट प्रोजेक्ट राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत शुरू किया गया है। परियोजना में SAIL के RDCIS की प्रमुख भूमिका है, जबकि Primetals Technologies तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है।

COP26 में पीएम मोदी का विजन
COP26 climate summit में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ‘पंचामृत’ संकल्प के तहत भारत की उत्सर्जन घटाने की रणनीति पेश की थी। इसमें 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य के साथ इस्पात जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में तुरंत कार्बन फुटप्रिंट कम करने पर जोर दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के COP26 विजन के अनुरूप यह परियोजना भारत को हरित और सतत औद्योगिक भविष्य की ओर ले जाएगी।
वैश्विक स्तर पर नई पहचान
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत के इस्पात उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान भी मिलेगी। यह कदम देश को लो-कार्बन और सतत औद्योगिक भविष्य की ओर तेजी से अग्रसर करेगा।

