Bokaro: बोकारो विधायक श्वेता सिंह ने झारखंड विधानसभा में बोकारो क्षेत्र के विस्थापित गांवों को पंचायती राज व्यवस्था में शामिल करने का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाए गए इस प्रश्न पर सदन में गंभीर चर्चा हुई और विस्थापित ग्रामीणों के अधिकारों को लेकर बहस छिड़ गई।

छह पंचायतों का गठन आज तक नहीं
विधायक श्वेता सिंह ने सदन को बताया कि अधिसूचना संख्या 94 दिनांक 23 मार्च 2002 के तहत बोकारो जिले के चास प्रखंड में 14 पंचायतों का गठन किया गया था। इसके बाद 29 सितंबर 2009 को संशोधित अधिसूचना के माध्यम से कनारी पंचायत का पुनर्गठन भी किया गया। इसके बावजूद कुंडोरी, पंचोरा, महुआर दक्षिण, महुआर उत्तरी, महेशपुर और बैधमारा जैसे छह पंचायतों का गठन आज तक नहीं किया गया है, जबकि प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी अधिसूचना जारी नहीं की गई।
50–60 हजार ग्रामीण पंचायत व्यवस्था से बाहर
विधायक ने बताया कि इन विस्थापित गांवों की आबादी करीब 50 से 60 हजार के बीच है। बोकारो इस्पात संयंत्र की स्थापना के लिए अपनी जमीन देने वाले ये ग्रामीण आज भी पंचायत व्यवस्था से बाहर हैं। इसके कारण उन्हें कई सरकारी योजनाओं और स्थानीय स्वशासन से जुड़े अधिकारों का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

सरकार ने भूमि अधिग्रहण और कानूनी स्थिति बताई वजह
इस पर पंचायती राज विभाग की ओर से जवाब देते हुए बताया गया कि संबंधित जमीन भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के तहत अधिग्रहित की गई थी। कई रैयत अब भी अपने मूल स्थान पर रह रहे हैं और पुनर्वास स्थल पर नहीं गए हैं। साथ ही बोकारो इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने न्यायालय के आदेशों के आलोक में इन क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था लागू करने के लिए अनापत्ति देने में असमर्थता जताई है।
भू-राजस्व प्रक्रिया से जोड़ना समाधान नहीं : श्वेता सिंह
सरकार के जवाब पर विधायक श्वेता सिंह ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि बार-बार इस मुद्दे को भू-राजस्व प्रक्रिया से जोड़ना समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान ने ग्रामीणों को पंचायती राज व्यवस्था के तहत अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार दिया है और यह अधिकार किसी भी परिस्थिति में छीना नहीं जा सकता।
औद्योगिक विकास में जमीन देने वालों को अधिकार मिले
विधायक ने कहा कि जिन लोगों ने देश के औद्योगिक विकास के लिए अपनी जमीन दी, उन्हें लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है। सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र निर्णय लेना चाहिए ताकि विस्थापित ग्रामीणों को पंचायत व्यवस्था और विकास योजनाओं का लाभ मिल सके।
अन्य विधायकों ने भी किया समर्थन
इस मुद्दे पर निरसा विधायक अरूप चटर्जी और चंदनकियारी विधायक उमाकांत रजक ने भी सदन में श्वेता सिंह का समर्थन किया। श्वेता सिंह ने दोनों विधायकों का आभार जताते हुए कहा कि यह केवल बोकारो का नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार और सामाजिक न्याय का प्रश्न है, और विस्थापित ग्रामीणों को उनका अधिकार दिलाने की लड़ाई जारी रहेगी।

