Bokaro: आधार कार्ड में जन्मतिथि (डेट ऑफ बर्थ) बार-बार बदलने के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। नए नियमों के तहत अब आधार में जन्मतिथि में बदलाव केवल विशेष परिस्थितियों में ही संभव होगा। यह नियम 24 दिसंबर 2025 से प्रभावी कर दिया गया है।

जन्मतिथि एक ही होती है
यूआईडीएआई के अनुसार किसी भी व्यक्ति की जन्मतिथि एक ही होती है, इसलिए सामान्य स्थिति में इसे बदलने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। हालांकि कई बार आधार नामांकन के दौरान ऑपरेटर की गलती, अनुमानित जानकारी दर्ज होने या गलत दस्तावेज जमा करने के कारण जन्मतिथि गलत दर्ज हो जाती है। ऐसे मामलों में ही संशोधन की अनुमति दी जाएगी, बशर्ते संबंधित व्यक्ति के पास प्रमाणित और सत्यापन योग्य दस्तावेज उपलब्ध हों।
यदि किसी आधार धारक ने
नए नियम के तहत जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में जन्म प्रमाण पत्र को सबसे अधिक मान्यता दी गई है। यदि किसी आधार धारक ने पहले ही जन्म प्रमाण पत्र जमा किया है, तो सामान्य परिस्थितियों में दोबारा जन्मतिथि में बदलाव की अनुमति नहीं मिलेगी।

जबकि पांच से 18 वर्ष तक
बच्चों के लिए भी नई व्यवस्था लागू की गई है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के आधार नामांकन के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा, जबकि पांच से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए डिजिटल रूप से सत्यापित जन्म प्रमाण पत्र स्वीकार किया जाएगा।
आधार आवेदन को निष्क्रिय भी
यूआईडीएआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान यदि दस्तावेज गलत पाए जाते हैं या फर्जी जानकारी दी जाती है तो संबंधित आधार आवेदन को निष्क्रिय भी किया जा सकता है।

