Bokaro: केंद्र सरकार द्वारा झारखंड के आंदोलनकारी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबू सोरेन (Dishom Guru) को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस सम्मान के लिए केंद्र का आभार व्यक्त किया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि करोड़ों आदिवासियों के दिल में ‘बाबा’ हमेशा ‘भारत रत्न’ रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया (X) पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि दिशोम गुरु का पूरा जीवन सामाजिक न्याय और शोषितों के अधिकारों के लिए संघर्ष का पर्याय रहा है। उन्होंने कहा कि गुरु जी के दशकों लंबे संघर्ष का ही परिणाम है कि आज झारखंड एक अलग राज्य के रूप में अपनी पहचान गर्व से साझा कर रहा है।
बोकारो के नेताओं ने उठाई भारत रत्न की मांग सम्मान का स्वागत करते हुए झामुमो के स्थानीय नेताओं ने उन्हें ‘भारत रत्न’ देने की वकालत की है। बोकारो झामुमो महानगर अध्यक्ष मंटू यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “गुरु जी का कद पद्म भूषण से कहीं बड़ा है। उन्हें भारत रत्न दिया जाना चाहिए था। झारखंड की जनता की ओर से यह मांग तब तक उठती रहेगी जब तक उन्हें उचित सम्मान नहीं मिल जाता।”

वहीं, जय झारखंड मजदूर समाज (JJMS) के महासचिव बी.के चौधरी ने केंद्र के फैसले का स्वागत करते हुए दुख जताया। उन्होंने कहा, “दिशोम गुरु ने मजदूरों और आदिवासियों की भलाई के लिए जो ऐतिहासिक भूमिका निभाई, उसके लिए वे भारत रत्न के असली हकदार थे। हम मांग करते हैं कि केंद्र जनभावनाओं का सम्मान करे और उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजे।”
ज्ञात हो कि 1973 में झामुमो की स्थापना करने वाले शिबू सोरेन का पिछले वर्ष अगस्त में निधन हो गया था, जिससे राज्य की राजनीति के एक युग का अंत हुआ।


