Bokaro: प्रदुषण के जिस दर्द के साथ बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) के विस्थापित गांवो के हज़ारो लोग रहने को मजबूर है। आज सोमवार को झारखण्ड के पूर्व मंत्री व पूर्वी जमशेदपुर के विधायक, सरयू राय ने केंद्रीय इस्पात मंत्री आर सी पी सिंह से मिलकर उनके दर्द को न सिर्फ बयां किया, बल्कि दामोदर नदी में बढ़ते प्रदुषण पर चिंता व्यक्त की।
सरयू राय, दामोदर बचाओ आंदोलन के अध्यक्ष है। उन्होंने केन्द्रीय इस्पात मंत्री से उनके उद्योग भवन, नई दिल्ली स्थित कार्यालय में मुलाकात की। साथ ही बीएसएल द्वारा दामोदर नदी को प्रदूषित किये जाने की वस्तुस्थिति से उन्हें अवगत कराया। उन्होने दामोदर नदी में बीएसएल द्वारा प्रदूषित बहिस्राव का ज़ीरो डिस्चार्ज न करने के स्तिथि में कंपनी के खिलाफ दंडात्मक कारवाई करने की मांग स्टील मिनिस्टर से की है।

राय ने इस्पात मंत्री को प्रदूषण की तस्वीरें भी दिखाई – जिसमे यह स्पष्ट रूप से दिख रहा है की कैसे बोकारो स्टील लिमिटेड के दूषित अम्लीय प्रवाह से दामोदर का पानी लाल हो रहा है। राय ने कहा कि “मैंने माननीय इस्पात मंत्री को बताया कि किस प्रकार दामोदर बचाओ आंदोलन के सतत प्रयास से विगत 15 वर्षों में दामोदर के किनारे स्थित औद्योगिक इकाइयों ने अपना दूषित बहिस्राव दामोदर में जाने से रोक दिया”।
विधायक, सरयू राय ने यह भी बताया कि, “औद्योगिक इकाइयों के दूषित बहिस्राव दामोदर में जाने से रोकने के कारण 2004-05 तक दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित नदियों में शुमार दामोदर का पानी 2018 आते आते औद्योगिक प्रदूषण से मुक्त होकर साफ़ हो गया और जगह जगह लोग इस पानी का घरेलू उपयोग करने लगे”।
बोकारो स्टील प्रबंधन भी दामोदर नदी में गिरने वाले अपने दूषित बहिस्राव का “ज़ीरो डिस्चार्ज” करने पर सहमत हो गया और अपना एक नाला 2018 में बंद कर दिया। बीएसएल ने दूसरे नाला से भी 2019 के दिसंबर तक ज़ीरो डिस्चार्ज करने का वादा किया। इसके बाद कोविड के पहले चरण में औद्योगिक गतिविधियाँ नियंत्रित हो जाने के कारण वातावरण और नदियाँ ज़्यादा साफ़ हो गईं। राय ने कहा कि “पर अब लगता है कि बोकारो स्टील लिमिटेड वादाखिलाफी पर उतर आया है और अपना दूषित बहिस्राव दामोदर में फिर से गिराने लगा है”।
राय ने बताया कि उन्होंने इस्पात मंत्री से बोकारो स्टील से दामोदर में प्रदूषित बहिस्राव का ज़ीरो डिस्चार्ज करने और पानी का रिसाइक्लिंग करने का आदेश देने का आग्रह किया। ऐसा नहीं होने की स्थिति में दामोदर जल को प्रदूषित करने के लिये बोकारो स्टील लिमिटेड पर दंडात्मक कारवाई करने तथा उसे अपने दूषित बहिस्राव का डिस्चार्ज दामोदर में नहीं करना सुनिश्चित कराने हेतु आदेश देने की माँग की।
बीएसएल में ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम लग चुका है. आउटफॉल-1 में यह सिस्टम जनवरी 2018 में ही लग चुका था और यह पूरी तरह कार्यरत है. आउटफॉल-2 में भी यह सिस्टम पिछले साल लगा दी गई और इसका ट्रायल 11 अगस्त 2020 को पहली बार किया गया. तब से आउटफॉल-2 में लगा सिस्टम भी कार्य कर रहा है पर अभी यह स्टेबलाइज़ेशन स्टेज में है. आउटफॉल-1 और आउटफॉल-2 में लगे एफ़्फ़्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट के द्वारा संयंत्र में इस्तेमाल किया हुआ पानी का ट्रीटमेंट कर पुन: प्लांट में ही उपयोग के लिए रीसाइकिल किया जाता है.
स्टेबलाइज़ेशन स्टेज में होने के कारण जब कभी-कभी तकनीकी कारणों से आउटफॉल-2 में लगे एफ़्फ़्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट को थोड़े समय के लिए जाँच व ट्रायल हेतु बंद करना पड़ता है, तो उस दौरान भी पानी का 100% ट्रीटमेंट स्रोत पर ही सुनिश्चित किया जाता है.
वर्तमान में बीएसएल अपने संयंत्र से बाहर पानी का डिस्चार्ज न्यूनतम स्तर पर ले आई है. कभी-कभी जो थोड़ा पानी का बाहर डिस्चार्ज हो भी रहा है, तो उसे पहले प्लांट में पूरी तरह से ट्रीटमेंट करने के पश्चात् ही छोड़ा जाता है और उसकी क्वालिटी भी तय मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाती है. पानी के क्वालिटी का टेस्टिंग दिन में दो बार प्लांट के लैब में किया जाता है और एनएबीएल द्वारा मान्यता प्राप्त थर्ड पार्टी लैब से भी कराई जाती है. इसके अलावा बाहर डिस्चार्ज होने वाले पानी का ट्रीटमेंट के बाद के क्वालिटी का 24 x 7 रियल टाइम मोनिटरिंग किया जाता है और यह पूरी तरह मानकों के अंदर है.
