Bokaro: पिछले करीब 11 महीनों से बोकारो पावर सप्लाई कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (BPSCL) का फ्लाई ऐश युक्त पानी गरगा नदी होते हुए दामोदर में बेहिचक बह रहा है। नदियां प्रदूषित हो रही हैं, ग्रामीण परेशान हैं, जांच रिपोर्ट मौजूद है, जुर्माना भी लग चुका है – लेकिन जिला प्रशासन और नमामि गंगे की जिला गंगा समिति शायद किसी और ही गंगा की तलाश में है।
मानो औद्योगिक सहयोग से साफ़ बह रही हो..
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB ) ने 12 अप्रैल 2025 को बीपीएससीएल पर 2.05 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया, यह बताने के लिए कि कूलिंग पोंड के आउटफॉल-3 से छाई मिश्रित पानी सीधे नदियों में जा रहा है। इसके बावजूद जिला गंगा समिति का रुख ऐसा है मानो दामोदर और गरगा नदियों में अब प्रदूषण नहीं, बल्कि “औद्योगिक सहयोग” से साफ़ बह रही हो। BPSCL ने अभी तक फाइन नहीं दिया है और स्तिथि भी कमोबेश वही है।
जिला गंगा समिति की “महत्वपूर्ण” बैठक में चर्चा नहीं
बुधवार को समाहरणालय में उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार की अध्यक्षता में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत जिला गंगा समिति की “महत्वपूर्ण” बैठक हुई। बैठक इतनी महत्वपूर्ण थी कि BPSCL के कारण प्रदूषित हो रहे जल स्रोतों पर एक शब्द भी खर्च नहीं किया गया। बताया गया कि बैठक का उद्देश्य जल स्रोतों की स्वच्छता, संरक्षण और पुनर्जीवन की समीक्षा करना था—शायद बिना यह देखे कि उन्हें गंदा कौन कर रहा है।

सेंसिटिव मामला नजरअंदाज ?
विडंबना यह भी है कि यह मामला विधानसभा में गूंज चुका है, विस्थापित और ग्रामीण जनसुनवाई में रो चुके हैं और प्रदूषण विभाग अपनी रिपोर्ट सौंप चुका है। लेकिन जिला गंगा समिति के लिए यह मुद्दा शायद बहुत ही ज्यादा सेंसिटिव है, इसलिए उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
निर्माल से नदियां तो बचेंगी, छाई खुद उड़ जाएगी ?
बैठक में पूरा जोर घरों और मंदिरों से निकलने वाले निर्माल पर रहा। डीडीसी ने पूजा सामग्री के वैज्ञानिक निस्तारण पर बल देते हुए जल स्रोतों के पास अलग कंटेनर लगाने के निर्देश दिए। शायद नदी में अगर छाई गिरे तो चलेगा, लेकिन फूल-पत्ती सीधे पानी में नहीं जाने चाहिए।
बैठक में इन बातों पर दिया गया जोर
बैठक में प्रशासन का फोकस घरों व मंदिरों से निकलने वाले निर्माल (पूजा सामग्री) के वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल निस्तारण पर रहा। डीडीसी ने नगर निकायों और बीएसएल नगर सेवा प्रशासन को जल स्रोतों के पास अलग से कंटेनर लगाने और ठोस कार्ययोजना बनाकर काम करने का निर्देश दिया।
सिल्ट चेंबर कार्य की समीक्षा
चास नगर निगम द्वारा कराए जा रहे सिल्ट चेंबर निर्माण कार्य की धीमी प्रगति पर डीडीसी ने नाराजगी जताते हुए समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
अतिक्रमण हटाने पर सख्ती
डीडीसी ने सभी अंचलाधिकारियों को तालाबों, नदियों और अन्य जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्राथमिकता पर करने तथा नियमित रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। बैठक में आगामी 2 फरवरी को वॉटर वेटलैंड डे पर इंटर कॉलेजों में प्रतियोगिता और फरवरी माह के अंत तक मेगा कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी और संबंधित प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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