झारखंड के कसमार प्रखंड के रघुनाथपुर गांव में 25 अगस्त को एक हिरण कुएं में गिरकर डूबने की कगार पर था। गहराई और ऊँची दीवारों के बीच फंसा हिरण लगातार संघर्ष कर रहा था। सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों और ग्रामीणों ने मिलकर घंटों की मशक्कत के बाद हिरण सुरक्षित बाहर निकला। थका और भीगा हुआ यह वन्यजीव इंसानी करुणा और सामूहिक सहयोग से जीवन पा सका, जो मानव-प्रकृति सह-अस्तित्व की मिसाल है। प्राथमिक उपचार के बाद, 27 अगस्त को हिरण को केदला मौजा के घने जंगल में उसकी प्राकृतिक प्रवास स्थली में छोड़ दिया गया।
घटना की शुरुआत
कसमार प्रखंड के बगदा पंचायत अंतर्गत लोधकियारी जंगल से भटकते हुए एक हिरण गांव में पहुंच गया। ग्रामीणों को देखकर हिरण घबरा गया और भागने की कोशिश में एक गहरे कुएं में गिर गया। यह दृश्य देखकर आसपास के लोग तत्काल मदद के लिए जुट गए।

सूचना और त्वरित कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही केंद्रीय वन पर्यावरण सुरक्षा सह प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष विष्णु चरण महतो और ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। मौके पर विभाग के प्रभारी वनपाल मो. तौहीद अंसारी, सुरेश टुडू और देवनाथ महतो पहुंचे और बचाव कार्य का नेतृत्व किया।
घंटों की मशक्कत के बाद बचाव
वनकर्मी और ग्रामीणों ने मिलकर कई घंटे की मेहनत के बाद हिरण को सुरक्षित रूप से कुएं से बाहर निकाला। इस दौरान किशून महतो, परमेश्वर महतो, राजेश महतो, दशरथ महतो, राम महतो, किष्टो महतो, हरीहर महतो और बंशी महतो समेत कई ग्रामीण सक्रिय रूप से मदद करते रहे।
प्राथमिक देखभाल और उपचार
बचाव के बाद हिरण को प्राथमिक देखभाल के लिए पेटरवार वन क्षेत्र कार्यालय लाया गया। हिरण को हल्की चोटें आई थीं, जिन्हें वन विभाग की टीम ने उपचार प्रदान किया।
मानव-प्रकृति सह-अस्तित्व की मिसाल
वन विभाग के प्रभारी मो. तौहीद अंसारी ने ग्रामीणों के सहयोग की सराहना की और कहा कि ऐसे प्रयास न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच सह-अस्तित्व की मिसाल भी पेश करते हैं। हिरण पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद केदला मौजा के घने जंगल में उसकी प्राकृतिक प्रवास स्थली में छोड़ दिया गया।
