By Megha Agarwal
Gomia: चिल्ड्रन वेलफेयर कमिटी के सदस्यों ने मंगलवार को दान किये गए जुड़वाँ बच्चो में से एक बच्चे को बरामद कर लिया। कमिटी दूसरे बच्चे को भी बुधवार को बरामद करने की पहल करेगी। बिना क़ानूनी प्रक्रिया के कोई भी बच्चे को दान या अडॉप्ट नहीं कर सकता। बुधवार को चिल्ड्रन वेलफेयर कमिटी की बेंच बैठेगी और इस सम्बन्ध में आगे की कार्यवाही करेगी। फिलहाल बरामद किया गया बच्चा सदर अस्पताल में है।

बताया जा रहा है की चिल्ड्रन वेलफेयर कमिटी के सदस्यों ने सुचना मिलते ही तुरंत जुड़वाँ बच्चे की खोजबीन शुरू कर दी। इसी बीच सदस्यों को पता चला की एक बच्चे को दान लेने के बाद उक्त दम्पति पटना लेकर जा रहे है। इससे पहले की वह दम्पति मंगलवार को पटना निकल पाते की सदस्यों ने बच्चे को बरामद कर लिया। दूसरा बच्चा एक परिवार के पास कसमार ब्लॉक के चंडीपुर गांव में है। जिसे कल बरामद कर लिया जायेगा।
यह बता दे की व्यवस्था और गरीबी की मार से परेशान होकर साड़म की एक दंपति के द्वारा अपने नवजात जुड़वां बच्चियों को दूसरे को दे देने के मामला संज्ञान में आते ही बाल संरक्षण विभाग हुआ रेस।मंगलवार को बाल संरक्षण विभाग के बेरमो शाखा के टीम के सदस्य निहारिका गौतम एवं शादिक अंसारी पीड़ित के घर पहुंचकर मामले की जानकारी ली। इस संबंध में बेरमो शाखा के संबंधित पदाधिकारी शशिकांत सिंह ने बताया कि शिशुओं को गोद लेने एवं देने की प्रक्रिया कानून होनी चाहिए, इसके लिए पीड़ित परिवार को विभागीय स्तर पर मदद भी की जायेगी।
मालूम हो कि बीते शनिवार को गोमिया के साड़म पश्चिमी पंचायत स्थित केवट टोला निवासी मयन केवट एवं उसकी पत्नी शांति देवी ने अपनी व्यवस्था व गरीबी की मार से परेशान होकर न चाहते हुए भी अपने एक दिन की नवजात जुड़वा बच्चियों को दूसरे के हवाले कर दिया था।
इस संबंध में पहले से ही परिवार के बोझ के तले दबे उन नवजात बच्चियों के पिता मयन केवट ने कहा था कि वह एक दिहाड़ी मजदूर है। मजदूरी भी रोजाना नही मिलती है, जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है।वे किसी तरह अपने परिवार का भरण पोषण कर पाते हैं।ऐसे में जुड़वा बच्चियों का जन्म लेना उनके लिए एक बोझ के समान है।कहा कि दयनीय स्थिति होने के कारण वे अपने परिवार का भरण पोषण काफी तंगहाली हालत में कर पाते हैं।उन नवजात बच्चियों की परवरिश अच्छे से करना मेरे वश की बात नहीं थी।मजबूर होकर अपने कलेजे के टुकड़े को दूसरे के हाथों में सौपना पड़ा,जिससे कि बच्चियों की अच्छी परवरिश हो सके।कहा कि वे स्वेच्छा से शनिवार की सुबह जुड़वा बच्चियों में से एक बच्ची को चंडीपुर निवासी अपने रिश्तेदार के यहां, वहीं दूसरी बच्ची को होसिर निवासी सुजीत प्रसाद को दिया।सुजीत प्रसाद की पत्नी नीरा कुमारी ने बताया था कि वे बिहार के पटना स्थित अपने निसंतान रिश्तेदार के लिए बच्ची को गोद लिया है।
