Bokaro: दो माह पूर्व बोकारो जिले में “खनिज यूरेनियम रखने और बेचने की योजना” के संदेह में पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया था। उक्त मामले में पुलिस ने परमाणु ऊर्जा अधिनियम से संबंधित प्रावधानों को दायर आरोपपत्र से हटा दिया है, जो यह दर्शाता है कि जब्त सामग्री यूरेनियम नहीं था।
तीन जून को गिरफ्तारी के बाद से सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। बोकारो पुलिस ने “आरोपी के कबूलनामे” और अन्य सबूतों के आधार पर आरोप पत्र दायर किया और उन सभी सातों पर जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक साजिश सहित अन्य आरोप लगाए है।

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में आईपीसी की धारा 34 और परमाणु ऊर्जा अधिनियम के प्रावधानों को हटा दिया, जिनका उल्लेख प्राथमिकी में किया गया था। बता दें, पुलिस ने 3 जून को दो आरोपियों के पास से 6.4 किलोग्राम “यूरेनियम खनिज” जब्त करने की घोषणा की थी, जिन्हें पांच अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया था।
हालांकि, 10 जून को, विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा: “परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार ने सामग्री के नमूने की उचित जाँच और प्रयोगशाला विश्लेषण के बाद यह पाया है की जब्त की गई सामग्री यूरेनियम नहीं है और न ही रेडियोधर्मी”। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार सभी सातों आरोपियों ने पुलिस से झूठ क्यों बोला। जांच जारी है। आरोपीयो की यह धारणा थी कि उनके पास जो सामग्री थी वह यूरेनियम थी।
जुलाई में, सभी सात आरोपियों की जमानत याचिका न्यायिक मजिस्ट्रेट के साथ-साथ एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने खारिज कर दी थी।
