Tears turned into smiles as differently-abled persons received battery tricycles, boosting their mobility and independence.
Bokaro: आंखों में आंसू, चेहरे पर मुस्कान और दिल में नई उम्मीद, समाहरणालय परिसर में मंगलवार को कुछ ऐसा ही भावुक नज़ारा देखने को मिला। वर्षों से दूसरों के सहारे चलने वाले दिव्यांगजन जब अपने हाथों से बैटरी चालित ट्राईसाइकिल थामे, तो मानो उन्हें नई ज़िंदगी मिल गई।

कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत Bharat Coking Coal Limited के सहयोग से दिव्यांगजनों के बीच बैटरी चालित ट्राईसाइकिल का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम में उपायुक्त Ajay Nath Jha ने 10 चयनित लाभार्थियों को ट्राईसाइकिल सौंपते हुए उनके जीवन में नई रोशनी भरने की पहल की।

लाभार्थियों की छलकी भावनाएं
ट्राईसाइकिल पाते ही कई दिव्यांगजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। किसी ने इसे “नई आज़ादी” कहा, तो किसी ने “जीने की नई राह”। अब तक दूसरों के सहारे चलने वाले ये लोग, अपने दम पर आगे बढ़ने की उम्मीद से भर उठे। उनके चेहरों की मुस्कान साफ बता रही थी कि यह सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की वापसी है।
आत्मनिर्भरता ही असली सशक्तिकरण – डीसी
इस मौके पर उपायुक्त Ajay Nath Jha ने कहा, “दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना ही सच्चा सशक्तिकरण है। बैटरी चालित ट्राईसाइकिल उन्हें शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन में सक्रिय भागीदारी का अवसर देगी। प्रशासन की प्राथमिकता है कि हर दिव्यांग व्यक्ति समाज की मुख्यधारा से जुड़े।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि CSR के माध्यम से कंपनियां समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में अहम भूमिका निभा रही हैं और आगे भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे।
मुख्यधारा से जोड़ने की पहल
डीसी ने जोर देते हुए कहा कि दिव्यांगजनों को समाज से अलग नहीं, बल्कि उसके केंद्र में लाना प्रशासन का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि यह पहल उनके जीवन को न सिर्फ आसान बनाएगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी देगी।

