More than 80 steel industry experts gathered at Bokaro Steel Plant for a two-day national conference on coal, coke and coal chemicals, focusing on digitisation, safety, decarbonisation and advanced steel technologies.
Bokaro: बोकारो स्टील प्लांट (BSL) में “कोल, कोक एवं कोल केमिकल्स” विषय पर 53वीं ऑपरेटिंग कमेटी की बैठक का आयोजन 7 एवं 8 मई 2026 को किया जा रहा है। आरडीसीआईएस रांची के समन्वय में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर के इस्पात उद्योग से जुड़े 80 से अधिक विशेषज्ञ और तकनीकी प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

सम्मेलन का उद्घाटन गुरुवार को मानव संसाधन ज्ञानार्जन एवं विकास विभाग के मुख्य सभागार में किया गया। इस दौरान बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन ने कार्यक्रम की उपयोगिता और उद्योग के भविष्य में इसकी अहम भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के तकनीकी मंच उद्योग में नई सोच और बेहतर कार्यप्रणाली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कोकिंग ऑपरेशन की चुनौतियों पर साझा हो रहे अनुभव
बैठक में कोयला, कोक एवं कोल केमिकल्स प्रबंधन से जुड़ी पारंपरिक और नई चुनौतियों पर मंथन किया जा रहा है। विशेषज्ञ परिचालन दक्षता बढ़ाने, सुरक्षा मानकों को मजबूत करने तथा आधुनिक तकनीकों को अपनाने के उपायों पर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। कार्यक्रम में बीएसएल के कोक ओवन एवं कोल केमिकल्स विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।

डिजिटलीकरण और डीकार्बोनाइजेशन पर विशेष फोकस
दो दिवसीय तकनीकी सत्रों में सेल की विभिन्न इकाइयों के साथ-साथ जेएसडब्ल्यू स्टील, टाटा स्टील, आरआईएनएल और एनआईएनएल सहित कई प्रमुख इस्पात कंपनियों के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इसके अलावा अनुसंधान संस्थानों और उद्योग सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में शामिल हुए हैं।
विशेषज्ञ कार्यस्थल सुरक्षा, डिजिटलीकरण, डीकार्बोनाइजेशन और कोयला एवं कोक संचालन में अत्याधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल जैसे विषयों पर विचार रख रहे हैं। सम्मेलन में इस्पात उत्पादन प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
पर्यावरण-अनुकूल इस्पात उत्पादन पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के साझा मंथन और अनुभवों के आदान-प्रदान से भविष्य में तकनीकी रूप से उन्नत और पर्यावरण-अनुकूल इस्पात उत्पादन प्रणाली को मजबूती मिलेगी। सम्मेलन को भारतीय इस्पात उद्योग में नवाचार और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

