Bokaro : बोकारो स्टील प्लांट में ठेकाकर्मियों की प्रस्तावित छंटनी को लेकर माहौल गरमाने लगा है। जय झारखंड मजदूर समाज ने विभागीय स्तर पर जनजागरण अभियान तेज करते हुए मोदी सरकार पर मजदूर विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। कोक ओवेन एंड कोक केमिकल विभाग के बैटरी नंबर-4 के सामने आयोजित कार्यक्रम में संगठन के महामंत्री व झामुमो केंद्रीय सदस्य बीके चौधरी ने कहा कि बोकारो कोई विशाखापट्टनम नहीं है, बल्कि यह भगवान बिरसा मुंडा और सिदो-कान्हू की धरती है, जहां अन्याय के खिलाफ हमेशा संघर्ष हुआ है।

‘विस्थापितों ने दी जमीन, अब रोजी-रोटी पर संकट’
बीके चौधरी ने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट में कार्यरत 90 से 95 प्रतिशत ठेकाकर्मी स्थानीय मूलवासी और विस्थापित परिवारों से आते हैं। इनके पूर्वजों ने प्लांट निर्माण के लिए अपनी जमीन औने-पौने दाम में दी थी। अब इन्हीं परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से ही ठेका मजदूरों का आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है और अब 40 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी का आदेश पूरी तरह अमानवीय है।
‘कम मैनपावर में उत्पादन की तुलना गलत’
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार निजी कंपनियों में कम मैनपावर के साथ हो रहे उत्पादन का हवाला देकर बोकारो स्टील प्लांट पर दबाव बना रही है। जबकि इस प्लांट की स्थापना केवल उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास और बेरोजगारी दूर करने के उद्देश्य से की गई थी। मजदूर नेताओं ने कहा कि इस तरह के आदेश से मजदूरों के साथ-साथ अधिकारियों में भी अफरातफरी का माहौल है और इसका असर उत्पादन पर भी पड़ रहा है।

12 मई को ‘हल्लाबोल’ कार्यक्रम का आह्वान
सभा के अंत में बीके चौधरी ने 12 मई 2026 को दोपहर 12:30 बजे प्लांट गोलचक्कर में प्रस्तावित ‘हल्लाबोल’ कार्यक्रम में हजारों की संख्या में पहुंचकर एकजुटता दिखाने की अपील की। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीकेएस मुंडा ने की, जबकि संचालन संयुक्त महामंत्री अनिल कुमार ने किया।
इस मौके पर एनके सिंह, रौशन कुमार, आरबी सिंह, तुलसी साहू, एके मंडल, आई अहमद, रामा रवानी, आमोद कुमार, आरआर सोरेन, बादल कोयरी, कार्तिक सिंह, जेपी सोरेन, दयाल मांझी, नूर अंसारी, मनोज एक्का, तपेसर महतो, सचिन कुमार समेत बड़ी संख्या में मजदूर नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

