Bokaro: बोकारो में वेदांता ईएसएल स्टील लिमिटेड (ESL Steel) ने ट्रैफिक पुलिस को छह नए अल्कोहल टेस्टर दिए हैं। दिलचस्प यह है कि जिले में पहले से 20 ब्रीथ एनालाइजर मौजूद हैं, लेकिन पूरे साल में सिर्फ 150 ड्रंक-ड्राइविंग मामले पकड़े गए। अब सवाल यह है कि शराब पीने वाले कम हैं या जांच अभियान ज्यादा ‘संयमित’ रहे हैं ?

छह नए अल्कोहल टेस्टर
बताया जा रहा है कि सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में ESL Steel ने शुक्रवार को अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) कार्यक्रम के तहत ट्रैफिक पुलिस को छह नए अल्कोहल टेस्टर उपलब्ध कराए। कंपनी की ओर से ये उपकरण चास की अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) प्रांजल ढांडा को सौंपे गए, जिन्होंने बाद में इन्हें ट्रैफिक पुलिस के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया।

सीएसआर के तहत ट्रैफिक पुलिस को मिला सहयोग
वेदांता ESL Steel की इस पहल का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना और नशे में वाहन चलाने वालों पर प्रभावी निगरानी स्थापित करना है। प्रशासन का मानना है कि नए उपकरणों से जांच प्रक्रिया और अधिक सशक्त होगी। अल्कोहल टेस्टर के माध्यम से नशे की अवस्था में वाहन चलाने वाले चालकों की पहचान करने में आसानी होगी। इससे सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, यातायात नियमों के बेहतर अनुपालन और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
आंकड़े खड़े कर रहे कई सवाल
हालांकि इस पहल के साथ कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। बोकारो जिले में पहले से ही 20 ब्रीथ एनालाइजर उपलब्ध हैं। इनमें 16 विभिन्न थानों और चार ट्रैफिक विंग के पास तैनात हैं। इसके बावजूद पिछले एक वर्ष के दौरान नशे में वाहन चलाने के महज करीब 150 मामले ही दर्ज किए गए।
हजारों शराब उपभोक्ता, फिर सिर्फ 150 मामले क्यों?
शहर और आसपास के इलाकों में सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं। शराब उपभोक्ताओं की संख्या भी हजारों में बताई जाती है। बोकारो में शराब पीने वालों ने पिछले साल 195 करोड़ रूपये की शराब पी गए। ऐसे में केवल 150 मामलों का पकड़ा जाना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या अधिकांश लोग शराब पीने के बाद वाहन चलाने से बच रहे हैं, या फिर जांच अभियान अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
उपकरण बढ़े, अब कार्रवाई पर रहेगी नजर
छह नए अल्कोहल टेस्टर मिलने से ट्रैफिक पुलिस की क्षमता निश्चित रूप से बढ़ेगी। हालांकि सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उपकरणों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। नियमित, सघन और प्रभावी जांच अभियान ही यह तय करेंगे कि सड़कों पर नशे में वाहन चलाने वालों पर वास्तव में कितना अंकुश लग पाता है।

