Bokaro: वैश्विक स्तर पर ईरान-इजराइल संघर्ष और होर्मुज समुद्री मार्ग में आपूर्ति बाधित होने से ऊर्जा संकट गहराने लगा था। इसका सीधा असर भारत के स्टील उद्योग पर भी पड़ने लगा। स्टील उत्पादन के लिए जरूरी प्रोपेन गैस (Propane Gas) की उपलब्धता तेजी से घट रही थी और कई संयंत्रों के सामने उत्पादन प्रभावित होने का खतरा खड़ा हो गया था। ऐसे मुश्किल समय में सेल के महारत्न उपक्रम बोकारो स्टील प्लांट (BSL) ने अपनी त्वरित कार्यशैली और तकनीकी दक्षता से एक बड़ा उदाहरण पेश किया।

15 दिन का बचा था प्रोपेन स्टॉक
प्रोपेन के भंडार तेजी से घटकर महज 15 दिनों की जरूरत तक सिमट गए थे। स्टील मेल्टिंग शॉप, कोल्ड रोलिंग मिल और गैल्वेनाइजिंग लाइन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में उत्पादन रुकने की आशंका बढ़ने लगी थी। हालात की गंभीरता को देखते हुए बीएसएल प्रबंधन ने वैकल्पिक ईंधन के रूप में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) अपनाने का फैसला किया।

नेतृत्व और टीमवर्क ने दिखाई राह
निदेशक प्रभारी प्रिया रंजन और कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) अनुप कुमार दत्त के नेतृत्व में यूटिलिटीज विभाग ने मिशन मोड में काम शुरू किया। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ गैस सेल्स एग्रीमेंट किया गया। आईओसीएल ने संयंत्र की सीमा तक दो किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई, जबकि बीएसएल के इंजीनियरों ने प्लांट परिसर के भीतर सात किलोमीटर लंबा पीएनजी नेटवर्क तैयार करने का जिम्मा संभाला।
चालू उत्पादन के बीच दिन-रात चला अभियान
बीएसएल के मुख्य संचार प्रमुख मणिकांत धान ने बताया कि अत्यधिक गर्मी, भारी मशीनों की आवाजाही और चौबीसों घंटे चल रहे उत्पादन के बीच पाइपलाइन निर्माण, वेल्डिंग, प्रेशर टेस्टिंग और ट्रायल का काम समानांतर रूप से किया गया। सबसे बड़ी बात यह रही कि पूरे अभियान के दौरान उत्पादन कहीं भी नहीं रोका गया।
सात दिन में तैयार हुआ 7 किमी का नेटवर्क
सिर्फ सात दिनों में पूरा नेटवर्क तैयार कर 15 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया। पीएनजी पर सफल ट्रायल के बाद संयंत्र का संचालन निर्बाध रूप से जारी है। इससे न केवल उत्पादन सुरक्षित हुआ बल्कि ईंधन लागत में भी करीब 40 प्रतिशत की कमी आई। साथ ही भंडारण और परिवहन से जुड़े जोखिम भी कम हुए तथा कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई।
संकट को अवसर में बदलने की मिसाल
करीब डेढ़ महीने से पीएनजी के जरिए संयंत्र का संचालन सुचारु रूप से चल रहा है। इस दौरान करोड़ों रुपये की बचत होने का अनुमान है। वैश्विक संकट के बीच बीएसएल की यह उपलब्धि न केवल भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि चुनौती कितनी भी बड़ी क्यों न हो, संकल्प, तकनीक और टीमवर्क के दम पर उसे अवसर में बदला जा सकता है।

